पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

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बुधवार, 28 जून 2017

712..बनेगी अपनी बातें...


२ ८ जून २ ० १ ७ 

।।जय भास्करः।।
नमस्कारः सर्वेषाम्।
अथ श्री सुभाषित कथ्य से...


नही,  दिखती वो राहें
जिन्हें दिखाया किसी और ने..
था तो, वो एक इशारा,
कुछ लंबी, थोड़ी छोटी, कुछ आड़ी, थोड़ी तिरछी या थी बंद...
बनेगी अपनी बातें...
जब  उन राहों पर चल पड़ेगें हमारे कदम...

इन्हीं बातों को मद्देनज़र रखते हुए
आप सभी प्रस्तुत लिंको की और नज़र डाले

'डाँं अपर्णा त्रिपाठी' द्वारा रचित रचना ' पलाश ' से 


वक्त बता गया ये तो महीने भर की रोटी थी

कुछ भी तो नही किया, ये कहा था जन्मदाता से
पिता बन अहसास हुआ, उफ..

"'श्रीमती अजीत गुप्ता' का कोना "  से एक मर्मस्पर्शी रचना  


कल एक पुत्र का संताप से भरा पत्र पढ़ने को मिला।
 उसके साथ ऐसी भयंकर दुर्घटना  हुई थी 
जिसका संताप उसे आजीवन भुगतना ही होगा।
 पिता आपने शहर में अकेले रहते थे, उन्हें शाम
 को गाड़ी पकड़नी थी पुत्र के शहर जा..

कम शब्दों में गहरी बातो को रखने की कला 
'डॉ. सुशील कुमार जोशी' जी की रचना 



पूरी कहानियोँ
के ढेर के नीचे

कलेजा
बड़ा होना
जरूरी
होता है
हनुमान जी

'श्री गगन शर्मा' द्वारा रचित रचना "कुछ  अलग सा" से 




कि राम-रावण युद्ध का मुख्य कारण शूर्पणखा ही है 
पर कुछ रचनाकारों का मत कुछ अलग भी है, जिसे
 नकारा नहीं जा सकता। उनके अनुसार शूर्पणखा का राम और लक्ष्मण
 के पास जा प्रणय निवेदन करना सिर्फ एक दिखावा था असल में वह रावण के समूल नाश की एक भूमिका थी।

'श्रीमती श्वेता सिन्हा ' द्वारा सुंदर  ग़ज़ल  "मन के पाखी" से 




निगाहें ज़माने की झिर्रियों में खड़ी होती है

टूटना ही हश्र रात के ख्वाबों का फिर भी



अन्वीक्षा कर,
 नवीसी के साथ साथ संवाद,सुझाव की आकांक्षी
'' विचारपूर्ण प्रवाह की वेग थमने न पाए ''
।।इति शम।।
पम्मी सिंह


17 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात बहन पम्मी
    शानदार रचनाए पढ़वाई आज आपने
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. आजकका यह अनूठा संकलन पढकर मन प्रसन्न हो गया। समस्त कवियों, लेखकों और प्रस्तुतकर्ता को हमारी शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. शुभ प्रभात ! वाह पम्मी जी! आज के अंक का सजा -संवरा रूप नवीनता का अहसास कराता है। सुन्दर भावों को जगाती रचनाओं का संकलन।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर संकलन,आपकी मोहक टिप्पणी ने चार चाँद लगाया पम्मी जी। सुंदर लिंको़ का चयन । मेरी भी शुभकामनाएँ स्वीकार करे। मेरी रचना को मान देने के लिए आभार आपका।

    उत्तर देंहटाएं
  5. शुभप्रभात,आदरणीय
    पम्मी जी
    पूर्ण मनोयोग से बनाई गई प्रस्तुति
    एक से बढ़कर एक रचना
    प्रस्तुति की छटां बनाए रखिए
    सभी रचनाकारों को बधाई
    पाठकों से अनुरोध
    उनकी समीक्षा महत्वपूर्ण है
    बिना आपके हमारा उद्देश्य अपूर्ण है।
    आभार ,
    "एकलव्य"

    उत्तर देंहटाएं
  6. लाज़बाब संकलन और प्रस्तुति।बधाई!!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. पम्मी जी,
    इस खूबसूरत संकलन में रचना सम्मलित करने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर लिंक संयोजन एवं प्रस्तुति.....

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह ! बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ! आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  10. क्या कहने हैं ! लाजवाब लिंक संयोजन ! बधाई आदरणीया पम्मी सिंह जी ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. आज की लाजवाब प्रस्तुति में 'उलूक' की बकबक को भी जगह देने के लिये आभार पम्मी जी।

    उत्तर देंहटाएं

  12. आप सभी के स्नेह, और टिप्पणी के लिए धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुंदर संयोजन ! बधाई एवं धन्यवाद स्वीकारें पम्मी जी ।

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुंदर संयोजन पम्मी जी।

    उत्तर देंहटाएं

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