पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

समर्थक

शनिवार, 3 जून 2017

687... बचपन



सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष

इस महीने का तीसरा दिन
तीन टिकट महाविकट
बेईमानी से जीतना हो तो तीन चांस की बात हम बचपन में करते थे
छप्पन में भी की जा सकती है बचपन शुरू ही तो होने वाला होता है फिर से


बचपन


थक   की  कहानी  थी,
परियों  का  फ़साना  था;
बारिश  में  कागज़  की  नाव  थी, हर  मौसम  सुहाना  था|
हर  खेल  में  साथी  थे,
हर  रिश्ता  निभाना  था;
गम  की  ज़ुबान  ना  होती  थी ,
ना  ज़ख्मों  का  पैमाना  था|



बचपन


बस रैन-बसेरा सड़कों पे,
और साँझ-सबेरा सड़कों पे।
वह हर दम पूछा करता, “क्यों?”
दुनिया में कोई मरता क्यों?
यूँ फंदे कसे ग़रीबी के,
घर पहुँचा मोटी बीबी के।
घर क्या था बड़ी हवेली थी



बचपन


आम के पेड़ अमरूद्ध की डाली ।
बेरों के कांटे मकड़ी की जाली॥
पापा की डांट मम्मी का प्यार।
छोटा सा बछड़ा था अपना यार॥
पतंगो की डोर खीचें अपनी ओर।
दादा के किस्सों का मिलता न छोर॥


बचपन


ज़िंदगी का लम्हा
बहुत छोटा सा है...
कल की
कोई बुनियाद नहीं है
और आने वाला कल
सिर्फ सपने में ही है


बचपन



अनोखी है इसकी चाल
अक्सर ये चुपचाप खड़ा
देखता दुनिआ  का सब हाल
न हम देख पाते इसे
न सुन पाते इसकी आहट  हैं
ये तो सिर्फ एक अहसास है
जो आकर गुजर जाता है।
दुःख में रबर सा खिंच कर.

><><

फिर मिलेंगे

विभा रानी श्रीवास्तव



7 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात दीदी
    सादर नमन
    उम्दा प्रस्तुति
    पचपन माने बचपन
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. सही बात है पचपन छप्पन पर ही पता चलता है जो जो पढ़ा लिखा था गलत हो गया था चलो दुबारा शुरु करें समझना :) बहुत सुन्दर प्रस्तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. शुभ प्रभात आदरणीय दीदी!
    अंकों का ज़िक्र खूबसूरती के साथ और अनुभव की पाठशाला का सबक शिद्दत के साथ. बधाई. सुन्दर लिंकों का संकलन.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बचपन को समर्पित यह अंक जीवन की ऊंची-नीची घाटियों से लेकर कल्पनालोक के सुन्दर सपनों का संग्रहणीय संयोजन है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. आदरणीय, शुप्रभात बचपन की मीठी स्मृतियों का
    बहुआयामी संकलन
    अतिसुन्दर ! आभार
    "एकलव्य"

    उत्तर देंहटाएं
  6. बचपन भुलाए न भूल पाता कोई
    बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...