निवेदन।


फ़ॉलोअर

712 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
712 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 28 जून 2017

712..बनेगी अपनी बातें...


२ ८ जून २ ० १ ७ 

।।जय भास्करः।।
नमस्कारः सर्वेषाम्।
अथ श्री सुभाषित कथ्य से...


नही,  दिखती वो राहें
जिन्हें दिखाया किसी और ने..
था तो, वो एक इशारा,
कुछ लंबी, थोड़ी छोटी, कुछ आड़ी, थोड़ी तिरछी या थी बंद...
बनेगी अपनी बातें...
जब  उन राहों पर चल पड़ेगें हमारे कदम...

इन्हीं बातों को मद्देनज़र रखते हुए
आप सभी प्रस्तुत लिंको की और नज़र डाले

'डाँं अपर्णा त्रिपाठी' द्वारा रचित रचना ' पलाश ' से 


वक्त बता गया ये तो महीने भर की रोटी थी

कुछ भी तो नही किया, ये कहा था जन्मदाता से
पिता बन अहसास हुआ, उफ..

"'श्रीमती अजीत गुप्ता' का कोना "  से एक मर्मस्पर्शी रचना  


कल एक पुत्र का संताप से भरा पत्र पढ़ने को मिला।
 उसके साथ ऐसी भयंकर दुर्घटना  हुई थी 
जिसका संताप उसे आजीवन भुगतना ही होगा।
 पिता आपने शहर में अकेले रहते थे, उन्हें शाम
 को गाड़ी पकड़नी थी पुत्र के शहर जा..

कम शब्दों में गहरी बातो को रखने की कला 
'डॉ. सुशील कुमार जोशी' जी की रचना 



पूरी कहानियोँ
के ढेर के नीचे

कलेजा
बड़ा होना
जरूरी
होता है
हनुमान जी

'श्री गगन शर्मा' द्वारा रचित रचना "कुछ  अलग सा" से 




कि राम-रावण युद्ध का मुख्य कारण शूर्पणखा ही है 
पर कुछ रचनाकारों का मत कुछ अलग भी है, जिसे
 नकारा नहीं जा सकता। उनके अनुसार शूर्पणखा का राम और लक्ष्मण
 के पास जा प्रणय निवेदन करना सिर्फ एक दिखावा था असल में वह रावण के समूल नाश की एक भूमिका थी।

'श्रीमती श्वेता सिन्हा ' द्वारा सुंदर  ग़ज़ल  "मन के पाखी" से 




निगाहें ज़माने की झिर्रियों में खड़ी होती है

टूटना ही हश्र रात के ख्वाबों का फिर भी



अन्वीक्षा कर,
 नवीसी के साथ साथ संवाद,सुझाव की आकांक्षी
'' विचारपूर्ण प्रवाह की वेग थमने न पाए ''
।।इति शम।।
पम्मी सिंह


Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...