सादर अभिवादन
उठते -गिरते आ गया हूँ
संक्षिप्त प्रस्तुति
कल सुधरा रूप दिखेगा
सादर
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज पंडित छन्नूलाल मिश्र का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया.
आजमगढ़ में जन्मे पंडित छन्नूलाल ने ठुमरी और पुरब अंग को
अपनी भावपूर्ण गायकी से अमर बनाया. वह किराना-बनारस घराने के प्रतिनिधि थे.
उन्हें 2020 में पद्म विभूषण से नवाजा गया था.
वो जानते थे कोयल और मोर किस स्वर में बात करते हैं। उन्हें बात करना आता था
चकवा, चकई और चकोर से।
मन जानता है—
वह रास्ता किसी न किसी दीवार में
धँस सकता है,
फिर भी वह
दरारों से रिसती रोशनी की
एक किरण खोज लेता है—
मानो किसी अनदेखे हाथ की छुअन,
जो अंधकार के भीतर भी
प्रकाश का आश्वासन देती रहती है।
फूलों से लदे इन बाग़ों की
और रंग बिरंगे फूलों की
हर कोई सिफ़त बतलाता है
हर कोई ख़ुशी जतलाता है
ख़ुशबू है वहाँ, रंगत है वहाँ
और पत्तों की संगत है वहाँ
जी करता है कुछ ले जाएं
और घर को अपने महकाएं
बेवकूफ
टिंग-टॉंग, टिंग-टॉंग, टिंग-टॉंग। “कौन है?” मैंने शॉल हटाते हुए पूछा। “पोस्टमैन” उधर से आवाज आयी। “आती हूँ” कहते हुए मैं चप्पलें पैर में फँसाने लगी। फँसाने इसलिए कि चिट्ठी लेकर मेरा फिर से सोने का इरादा था। वैसे भी छुट्टियाँ कम ही मिलती हैं उस पर छुट्टी के दिन सर्दियों की धूप अपने रेशमी एहसास के साथ पूरे आँगन में पसरी हो, तो कौन बेवकूफ होगा जो ऐसे दुर्लभ मौके को जाने देगा ? खैर अलसाते हुए मैं दरवाजे तक पहुँची । पोस्टमैन ने पीले लिफाफे में एक बड़ा सा कार्ड पकड़ा दिया।
आज बस
थकावट है
कल फिर
वंदन
कल फिर
वंदन





















