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शनिवार, 2 जुलाई 2022

3442... धन्य

                     हाज़िर हूँ...! पुनः उपस्थिति दर्ज हो...

नए वर्ष में नयी प्रस्तुति...  आपके साथ से हम हो जाते हैं

धन्य

धर्म व कर्म सिखाई मेदिनी

अधर्म व कुकर्म देखी मेदिनी

बाग-बगीचे लुप्त हो गई अवनी पर

भवन-बगीचे बन गई अवनी पर

धन्य

चारो ओर जल रही नफरत की यूँ अग्नि

कल पीले हुए हाथ आज विधवा हुई भगिनी ।। 

दो गज भू की खातिर बने हो खून के प्यासे

एक-दूजे को काटो लेकर हाथ गंड़ासे ।।

प्यार करना

गाजियाबाद जाऊँ और गुरुवर डॉ कुँवर बेचैन से मुलाक़ात किए बिना लौट आऊँ, ऐसा हो नहीं सकता। हो यह भी नहीं सकता कि खाली हाथ आऊँ...

उनका नया गीत संग्रह "लौट आए गीत के दिन" और उसी संग्रह का एक गीत पेश है-


भूल गए ये अपनी खुशियाँ,
लाने को सबके जीवन में हास,
कष्ट सहे कितने इन्होंने,
पर नही हुए उदास।

इंदिरा हिंदुजा ने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से स्त्री रोग विज्ञान में एमडी की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा में लगा दिया। हजारों लोगों का इलाज किया, लेकिन इतिहास रचने वाले तारीख यानि 6 अगस्त 1986 को आज भी याद किया जाता है। केईएम हॉस्पिटल में उन्होंने देश को पहली टेस्ट ट्यूब बेबी की सौगात दी थी। आज भले ही टेस्ट ट्यूब बेबी बहुत आम बात हो, लेकिन उस दौर में यह काफी दुर्लभ था। 
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पुनः भेंट होगी...
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6 टिप्‍पणियां:

  1. सदा की तरह....
    सदा बहार प्रस्तुति
    आभार
    सादर प्रणाम

    जवाब देंहटाएं

  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  4. आज की प्रस्तुति में डॉक्टर गांगुली और डॉक्टर पद्मावती से मिलना अच्छा लगा । बेहतरीन प्रस्तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं

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