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गुरुवार, 27 अगस्त 2020

1868...आसमान से आती चिलचिलाती धूप...


सादर अभिवादन। 

गुरुवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है। 

आसमान से आती 
चिलचिलाती धूप 
हरियाले खेतों में 
निराई-गुड़ाई करते 
तनों पर पड़ रही है 
क्वार का महीना है 
बाढ़ में कहीं 
फ़सल सड़ रही है। 
-रवीन्द्र 

आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-


ज़रूरी नहीं सिर्फ़ तुम्हारे पैमाने
से ज़िन्दगी संवारी जाए,
कभी कभार क्यों
ज़मीर के लिए
जीत के
बाज़ी हारी जाए - - 

 दिल एक मंदिर है, जिसमें एक मूरत है। 
मन-मंदिर में रखकर,हम उसे रिझाते हैं। 
 दिल एक दर्पण है, जिसमें एक सूरत है
पास जाकर उसके,हम प्रेम-गीत गाते हैं। 


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इस से पहले कि बेवफ़ा हो जाएँ
क्यूँ दोस्त हम जुदा हो जाएँ
तू भी हीरे से बन गया पत्थर
हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएँ

चीनी यात्रीयों में मुख्यतः बौद्ध भिक्खु ही थे जिन के आने का मुख्य कारण बौद्ध धर्म की जानकारी और गहन अध्ययन था. पर उनका उस समय के रास्ते, गाँव, शहरों और शासन तंत्र के बारे में लिखना इतिहास जानने का अच्छा साधन है


Hindi diwas

हम भूल जाते हैं कि कोई भी पेड़ हरा- भराविशाल छायादार तभी रह सकता है  जब हम उसकी जड़ों को सींचे. उसकी ठीक तरह से देखभाल करें. मुझे डर है कि  जिस तरह देव भाषा संस्कृत मात्र वेदों और पुराणों की पुस्तकों में सिमट गई है. आज केवल गिने चुने लोग ही है जो उसे बोलते और समझते हैं. उसी तरह आज की स्थिति यदि यूँ ही बरकरार रहती है तो कहीं हमारी यह भाषा भी अपना अस्तित्व खो दे और केवल पुस्तकों में सिमट कर ही रह जाए.
*****

हम-क़दम का नया विषय

 आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगेआगामी मंगलवार। 

रवीन्द्र सिंह यादव

14 टिप्‍पणियां:

  1. इस से पहले कि बेवफ़ा हो जाएँ
    क्यूँ न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ
    तू भी हीरे से बन गया पत्थर
    हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएँ
    सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  3. नमस्कार रवींद्र जी , अच्छी प्रस्तुत‍ियां हैं परंतु आज इतनी कम क्यों हैं

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सादर नमन.
      इस पटल पर हम हर रोज़ केवल पाँच रचनाओं के लिंक प्रस्तुत करते हैं. विशेष प्रस्तुतिओं में संख्या बढ़ जाती है.
      इस अंक कविताएँ कम गद्य रचनाएँ ज़्यादा हो गईं हैं.
      सादर.

      हटाएं
  4. वाह!सुंदर प्रस्तुति अनुज रविन्द्र जी ।

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति, मेरी रचना शामिल करने के लिए हार्दिक आभार - - नमन सह।

    जवाब देंहटाएं
  6. सराहनीय प्रस्तुति उम्दा लिंक्स...
    सभी रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह बहुत सुंदर और भावपूर्ण प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  8. सराहनीय. 'चीनी यात्री'को शामिल करने के लिए धन्यवाद.

    जवाब देंहटाएं

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