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मंगलवार, 11 अगस्त 2020

...1852 कोविड काल में जीना सीख रहे हैं हम...


सादर अभिवादन। 

मंगलवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है। 
कोविड काल में 
जीना 
सीख रहे हैं 
हम,
वैक्सीन का 
इंतज़ार है 
जिसका 
दाम हो कम। 
-रवींद्र 

 आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर

Water, Wastage, Save, Water Public, Tap 
घर से लेकर आती हैं 
मटका-भर उदासी,
वापस ले जाती हैं 
थोड़ा-सा पानी 
और ज़रा-सी ख़ुशी.

 
 माड़ का कटोरा लिए हुए बच्चे
नाच रहे थे मरणासन्न मां के आसपास,
ईश्वर का काम ख़त्म हो चुका था...
अब खुशियों का बोझ बच्चों के कंधों पर था..

 

कभी किसी के दर्द का हिस्सा तो बन
किसी की मुस्कराहट का कारण तो बन 
तेरे आड़े वक़्त में यही पल खड़े होंगे ,तेरी ढाल बन कर 

 

दर्शन उनका ऊंचा है,जो गिरते को सम्हाला है।
दिल ही में समंदर है,गिरिवर,वन ,सहरा हैं ,
दिल ही में ईश्वर है,दिल ही में शिवाला है।

भारतीय "गणित ग्रन्थ" ...... विवेक सुरंगे 

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भारतीय "गणित ग्रन्थ", नाम ही पढ़ लो तो बहुत है पता नहीं कितने बचे है और कितने चुराए गए या जला दिए गए मुगलों द्वारा

*****

हम-क़दम का अगला विषय है-
'बादल'
इस विषय पर लिखिए 
आप अपनी किसी भी विधा की रचना 
और भेज दीजिए हमें कॉन्टैक्ट फ़ॉर्म के ज़रिये
15 अगस्त 2020 तक। 
उदाहरणस्वरूप कविवर माखन लाल चतुर्वेदी जी की एक कविता-


मधुर! बादल, और बादल, और बादल
माखनलाल चतुर्वेदी

"मधुर ! बादल, और बादल, और बादल आ रहे हैं
और संदेशा तुम्हारा बह उठा है, ला रहे हैं।।
गरज में पुरुषार्थ उठता, बरस में करुणा उतरती
उग उठी हरीतिमा क्षण-क्षण नया शृंगार करती
बूँद-बूँद मचल उठी हैं, कृषक-बाल लुभा रहे हैं।।
नेह! संदेशा तुम्हारा बह उठा है, ला रहे हैं।।
तड़ित की तह में समाई मूर्ति दृग झपका उठी है
तार-तार कि धार तेरी, बोल जी के गा उठी हैं
पंथियों से, पंछियों से नीड़ के रुख जा रहे हैं
मधुर! बादल, और बादल, और बादल आ रहे हैं।।
झाड़ियों का झूमना, तस्र-वल्लरी का लहलहाना
द्रवित मिलने के इशारे, सजल छुपने का बहाना।
तुम नहीं आए, न आवो, छवि तुम्हारी ला रहे हैं।।
मधुर! बादल, और बादल, और बादल छा रहे हैं,
और संदेशा तुम्हारा बह उठा है, ला रहे हैं।।"
-माखनलाल चतुर्वेदी


आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे आगामी गुरूवार। 

रवींद्र सिंह यादव 
  

12 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया प्रस्तुति..
    शानदार विषय..
    आभार..
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  2. सुंदर प्रस्तुति, सुंदर हलचल

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति सभी रचनाएं उत्तम रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 🙏🙏

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति, चयनित रचनाकारों को हार्दिक बधाई।आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐

    जवाब देंहटाएं
  5. सुंदर लिंक्स. मेरी कविता शामिल करने के लिए आभार

    जवाब देंहटाएं
  6. उत्कृष्ट लिंको के साथ शानदार प्रस्तुति...
    सभी रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत ही सुंदर और थोड़ी हट कर प्रस्तुति। कम शब्दों में बहुत कुछ कहनेवाली और सुंदर सन्देश देने वाली प्रस्तुति।
    सबों को सादर प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  9. Shamil karne ka bahut shukriya ...naye blog look me ... new post likhne me Hindi ka option nahi aa raha hai , complaint bhi likhi hai ...kya koi help kar sakta hai ... email id likhti hun..sharda.arora9@gmail.com

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत ही सुंदर और थोड़ी हट कर प्रस्तुति। पढ़ कर बहुत आनंद आया और नयी जानकारी भी मिली। सभी रचनाएँ कम शब्दों में अधिक कहने वाली रचनाएँ थीं। सुंदर प्रस्तुति के लिये हृदय से आभार। आप सबों को प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं

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