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सोमवार, 29 जून 2020

1809 हम-क़दम का इस्पेशियल अंक...बारिश

हम-क़दम का अंक आज
पाठकों की पसंद से
अपनी पसंद 
मिलाने की एक कोशिश है।
देश और दुनिया की
तमाम परेशानियाँ,मन की
उलझनें जीवन के साथ अनवरत
जारी रहेंगी
चलिए आइये
बारिश की रिमझिम फुहारों के
संगीत में
कुछ पल के लिए सबकुछ
भूलकर
 तरोताज़ा हो लीजिए 
सावन की सुगबुगाहट  है..
रिम-झिम बौछारें जारी हो गई है
गरम बड़ों,पकौड़ों के साथ आनन्द लें
आज के अंक का


ओ सजना बरखा बहार लाई




अबकी बरस भेजूँ भैय्या को पाती




डम-डम डिगा-डिगा




एक लड़की भीगी भागी सी



भीगी भीगी रातोंं मेंं



रिमझिम के गीत सावन गाये भीगी भीगी रातो में



रिम-झिम गिरे सावन



कोई लड़की है जब वो हँसती है बारिश आती है



सावन का महीना, पवन करे सोर 
जियारा रे झूमें ऐसे, जैसे बनमां नाचे मोर 
राम गजब ढाये ये पुरवइया 
नैय्या संभालो कित खोये हो खेवइया 

पुरवइया के आगे चले ना कोई जोर

.......
आज के लिए बस
कल आ रहे है भाई रवीन्द्र जी
125 वें विषय के साथ
सादर

13 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह!! वाह 👌👌👌👌👌सभी को सुप्रभात
    और प्रणाम 🌹🌹🙏🙏🌹🌹

    जवाब देंहटाएं

    जवाब देंहटाएं
  3. सावनी बहार आयी है आज तो हलचल में
    बहुत सुंदर

    जवाब देंहटाएं
  4. आज हलचल में सावनी बहार ने हलचल मच दिया।बहुत शानदार प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह बहुत खूबसूरत प्रस्तुति 👌👌

    जवाब देंहटाएं
  6. वाह!सुंदर ,संगीतमय प्रस्तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह क्या कहने।बहुत सुंदर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  8. जबरदस्त...
    लाजवाब नगमें...
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  9. बारिश के लाजबाव प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  10. बारिश की रिमझिम बुहार जो मन को शीतलता प्रदान कर गई और मिट्टी की सोंधी खुश्बू सा महकता आज की लाज़बाब प्रस्तुति,सादर नमन दी

    जवाब देंहटाएं
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