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बुधवार, 13 फ़रवरी 2019

1307..मैं उठूंगा और चल दूंगा उससे मिलने..

।।भोर वंदन।।
और एक सुबह मैं उठूंगा
मैं उठूंगा पृथ्वी-समेत
जल और कच्छप-समेत मैं उठूंगा
मैं उठूंगा और चल दूंगा उससे मिलने
जिससे वादा है कि मिलूंगा।
- केदारनाथ सिंह
हैं न..ये मिलती जुलती बातें ..
इसी वादे के साथ आज की लिंकों में शामिल रचनाकारों के नाम क्रमानुसार पढ़ें और विचारों से जरूर मिलें..✍

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी,
आदरणीया नुपुरम जी,
आदरणीया अनीता सैनी जी,
आदरणीय नीलांश जी,
आदरणीया अभिलाषा चौहान,
💫

कैसे   ज़िन्दा  ये  सुख़नवर  है  कई  सदियों  से ।।

लूट   जाते    हैं  यहाँ  देश   को    कुर्सी   वाले ।
देश  का  ये  ही  मुक़द्दर  है  कई   सदियों  से ।।

क्या   बताएंगे   मियाँ  आप   तरक्क़ी  मुझको ।
शह्र  में  भूख  का  मंजर  है  कई
💫
पथिक, 
चलते रहना 
तुम्हारी नियति है.
पर यदा-कदा 
विश्राम करना.
चना-चबैना 
जो अपनों ने 
साथ बांधा था,
उस पाथेय से भी
न्याय करना.
💫

 सत्य अहिंसा का पुजारी, बना आम इंसान,हक 
अपना बाँट रहा , सजी रसूखदारों  की दुकान |

  दरियादिली में डूब गया,जिंदगी को गया भूल महंगाई को सर पर बिठा,आम इंसान दर्द में रहा झूल |
मोहब्बत की मारामारी,सभी को एकबीमारी,
धुन वो मौसम  सा नहीं ,एक सवेरा  है 
💫


धुन मुझे मेरा  ही ले जाए दूर कहीं ,
मन को रोके हुए वो  एक  सपेरा है 
💫

जहर जुबां का ढाता कहर,
जिंदगी होती दोजख और बेजार।
टूटते दिल शब्दों की मार से,
तीर और तलवार से भी,
तेज होती इनकी धार
पनपतीे विष की अमर..
💫
हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए

।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह'तृप्ति'..✍

13 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ पल का सुकून
    बल देता है अपार,
    पथ पर चलते रहने का
    करते हुए जीवन का जाप.

    यह क्षणिक सुकून भी सबकी नियति है, अनेक पथिक सिर्फ चलते रहते हैं, कोई पड़ाव नहीं है।

    बहुत बढ़िया संकलन। सभी को प्रणाम।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. हार्दिक आभार. आप स्वयं पथिक हैं. पथ का गीत "पोथेर पांचाली" आपको तो पता ही होगा.

      हटाएं
  2. शुभ प्रभात सखी...
    अच्छी रचनाए पढ़वाई..
    आभार..
    सादर..

    उत्तर देंहटाएं
  3. शुभ प्रभात
    बेहतरीन रचना संकलन एवं प्रस्तुति
    सभी रचनाएं उत्तम मेरी रचना को स्थान देने के लिए सहृदय आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह बहुत सुन्दर भूमिका के साथ बेहतरीन लिंकों का चयन।
    शानदार प्रस्तुति।
    सभी रचनाकारों को बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  5. शुभ प्रभात आदरणीया पम्मी जी
    बेहतरीन हलचल प्रस्तुति 👌| शानदार रचनाओं में मुझे स्थान देने के लिए सह्रदय आभार आप का |
    सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनायें |
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  7. पम्मी जी,शुक्रिया जो पथ का गीत भी इस यात्रा में शामिल कर लिया.
    भोर का गीत
    और एक सुबह मैं उठूंगा
    मैं उठूंगा पृथ्वी-समेत
    जल और कच्छप-समेत मैं उठूंगा
    मैं उठूंगा और चल दूंगा उससे मिलने
    जिससे वादा है कि मिलूंगा।

    केदारनाथ सिंह

    उगते सूरज की तरह ऊर्जा भर गया.

    विचारों की यात्रा चलती रहे. सभी को बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  8. बेहद सुंदर भूमिका के साथ शानदार रचनाओं का संयोजन है आज के अंक में.पम्मी जी..बेहद उम्द संकलन।

    उत्तर देंहटाएं

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