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सोमवार, 9 नवंबर 2026

4920 दीप मालिका पर्व की शुभकामनाएं

 सादर अभिवादन

दीपावली की आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएँ।  
‘प्रकाश पर्व’ आज  भी है पर अन्नकूट कल होगा
आज भी अमावस है कभी  कभी ऐसा होता है..कल है अन्नकूट ,
गोवर्धन पूजा और चंद्र दर्शन  बाकी सारे त्यौहार ‘होली’, 
‘रक्षा बंधन’ जहाँ पूरे चाँद की जगमग रात में आते हैं, वहाँ यह एकमात्र ऐसा त्यौहार है
जो घोर तमस में डूबी अमावस की रात में आता है, 
और रात में ही मनाया जाता है। कैसा विरोधाभास है कि सबसे गहन
अंधकार में डूबी रात को ही कहा जाता है ‘प्रकाश पर्व’। 
और यह प्रकाश पर्व मनाया भी कैसे जाता है ? पूरा परिवार एक साथ एकत्र
होकर उस अँधेरी रात को दीपों के प्रकाश से रोशन करता है। 
चुनौती देता है अँधेरे को कि ‘‘हम एक साथ हैं, और एक साथ ही
तेरे इस स्याह साम्राज्य से लड़ रहे हैं, लड़ रहे हैं
****
अब देखिए रचनाएं ....




जिसने जी भर अभ्यास किया,
श्रम से न कभी मुँह फेरा है,
उसने कर्म का मर्म साध लिया, 
वही वास्तव में धनवान है ।

श्री सरल सबल संवेदना है ।
आरोग्य संतुलित योग है ,
संतोष-सब्र जिसकी पूंजी है,
वही वास्तव में धनवान है ।




साफ-सफ़ाई, दीप प्रज्वलन 
सुख-समृद्धि किसे नहीं भाती,
स्वर्ण, रजत या किसी धातु के 
अलंकार व वस्तु घर आती !






किसी की याद में कब-तक गुज़ार लेगा दिन,
हुआ है इश्क़ तो फिर क्यों बता नहीं देता.

उदासियों की सिलाई उधेड़ दूं लेकिन,
वो दिल के दर्द का अपने सिरा नहीं देता.





प्यार दो विश्वास दो
प्रभु ज्ञान की वह प्यास दो
पा जिसे ढूँढू सरोवर ।
सरित सागर शिखर अम्बर ।
ज़िन्दगी को आस दो ।






सादर समर्पित
वंदन

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