सादर अभिवादन
दीपावली की आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएँ।
‘प्रकाश पर्व’ आज भी है पर अन्नकूट कल होगा
आज भी अमावस है कभी कभी ऐसा होता है..कल है अन्नकूट ,
गोवर्धन पूजा और चंद्र दर्शन बाकी सारे त्यौहार ‘होली’,
गोवर्धन पूजा और चंद्र दर्शन बाकी सारे त्यौहार ‘होली’,
‘रक्षा बंधन’ जहाँ पूरे चाँद की जगमग रात में आते हैं, वहाँ यह एकमात्र ऐसा त्यौहार है
जो घोर तमस में डूबी अमावस की रात में आता है,
जो घोर तमस में डूबी अमावस की रात में आता है,
और रात में ही मनाया जाता है। कैसा विरोधाभास है कि सबसे गहन
अंधकार में डूबी रात को ही कहा जाता है ‘प्रकाश पर्व’।
अंधकार में डूबी रात को ही कहा जाता है ‘प्रकाश पर्व’।
और यह प्रकाश पर्व मनाया भी कैसे जाता है ? पूरा परिवार एक साथ एकत्र
होकर उस अँधेरी रात को दीपों के प्रकाश से रोशन करता है।
होकर उस अँधेरी रात को दीपों के प्रकाश से रोशन करता है।
चुनौती देता है अँधेरे को कि ‘‘हम एक साथ हैं, और एक साथ ही
तेरे इस स्याह साम्राज्य से लड़ रहे हैं, लड़ रहे हैं
****
तेरे इस स्याह साम्राज्य से लड़ रहे हैं, लड़ रहे हैं
****
अब देखिए रचनाएं ....
जिसने जी भर अभ्यास किया,
श्रम से न कभी मुँह फेरा है,
उसने कर्म का मर्म साध लिया,
वही वास्तव में धनवान है ।
श्री सरल सबल संवेदना है ।
आरोग्य संतुलित योग है ,
संतोष-सब्र जिसकी पूंजी है,
वही वास्तव में धनवान है ।
साफ-सफ़ाई, दीप प्रज्वलन
सुख-समृद्धि किसे नहीं भाती,
स्वर्ण, रजत या किसी धातु के
अलंकार व वस्तु घर आती !
किसी की याद में कब-तक गुज़ार लेगा दिन,
हुआ है इश्क़ तो फिर क्यों बता नहीं देता.
उदासियों की सिलाई उधेड़ दूं लेकिन,
वो दिल के दर्द का अपने सिरा नहीं देता.
प्यार दो विश्वास दो
प्रभु ज्ञान की वह प्यास दो
पा जिसे ढूँढू सरोवर ।
सरित सागर शिखर अम्बर ।
ज़िन्दगी को आस दो ।
सादर समर्पित
वंदन






कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें
आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।
टिप्पणीकारों से निवेदन
1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।