निवेदन।


फ़ॉलोअर

बुधवार, 4 नवंबर 2026

4015.. थोड़ी सी बात..

 प्रातःवंदन

मौसम की बदलती फ़िजा  आजकल सुबह-शाम पर ही पता चलता है। हल्की ठंड की चादर ओढ़े भीनी- भीनी हवा और ओस की बूंद में भीगे पेड पौधे .. अच्छा लगता है न पर काली धुंध (प्रदूषण)..मतलब कुछ न कुछ रह ही जाता है..चलिए इन कवायदो को नजरअंदाज करते हुए नजर डालते हैं लिंको पर..✍️

यही है जीवन

सुख मिल जाये...

बस थोड़ा सा सुख मिल जाये

इसी आस में मन मानव का डोला करता

इधर-उधर जा निज शक्ति को तोला करता..

✨️

चलना-रुकना / बलराम अग्रवाल

 चलते-चलते वे रुक गये।

मेरा हाथ पकड़कर उपदेशक के अंदाज में बोले :

“जीवन, चलने और चलते रहने का नाम है!…लेकिन ‘चलने’ से तात्पर्य सिर्फ ‘पैर’ नहीं है, ‘साँस’ भी है!”

✨️

विचित्र वक़्त 

ख़ूब नचाता 

साँसें न लेने देता 

वक़्त का ये पहिया

सब बेज़ार,

ख़ुद पर भरोसा..

✨️

पगला है तू !

लोकतंत्र आबाद रहेगा बरसों तक 

रावण आज ज़रूर मरेगा, पगला है तू !

जब-जब पाप बढ़ेंगे भू पर ,प्रभु आएँगे 

नेता उनका रूप धरेगा,पगला है तू !

✨️

एक गीत -रेशम के घूँघट में

रेशम के 

घूँघट में हँसकर 

करे चाँदनी बात.

रंगोली की 

आभा सुंदर 

दीवाली की रात.

✨️

।।इति शम।।

धन्यवाद 

पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️






1 टिप्पणी:

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...