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मंगलवार, 8 फ़रवरी 2022

3298 ...लीन हो गई ब्रह्म में सहसा, उस देवी की तान

 सादर अभिवादन
लता के बगैर दूसरा दिन
कुछ गीत सुन लाजिए




 "सीखे कोई हृदय से लग
तुमसे पीर हिया की हरना....
क्या जानो तुम अभिनय करना
जानो बस मन आनंद भरना
अनभिज्ञ धुप-छाँव और ज्ञान से
जानो ना बातें छल की
फिर भी कैसे सीख गए तुम
खुद ही प्रेम की भाषा पढ़ना ?"


वसंत पंचमी गीत ..मीना शर्मा




कोकिला भी गर्वित होती
तुलना निज से जब सुनती थी
वागीश्वरी गले में रहती
नव स्वर बैठ सदा बुनती थी
वीणा के तारों में गूंथित
सदियों लहरायेगी कह दो।।


सन्डे की सुबह , लम्बी  कोरोना  पॉज़ी टिव रह कर हालिया नेगेटिव हुई.   घर सर पर  ही आ रहा था. कहाँ से क्या शुरू करूँ की जद्दोजहद से प हले लता जी का एकाध गीत  सुन लिया जाए , दिन भर के लिए कामों की प्लानिंग आसान  हो जायेगी! खुद ब खुद जैसे मोबाइल पर प्ले हुआ, " चिट्ठिये दर्द फ़िराक़ वालिये/ लेजा लेजा संदेसा सोणी यार दा...." मन मनिहारा हुआ अपनी ही चूड़ियों में खोया था कि खबर आई आज मौसीक़ी के हाथों की चूड़ियाँ चटक गईं....




स्वर की 'लता' आज मुरझाई,
सूख गया उद्यान ।
दुःखी जगत है,मौन हो गया,
कोकिल का वह गान।

जिसकी स्वर-लहरी के कारण,
हृदय प्रफुल्लित होता।
जिसका स्वर्णिम गायन सुनकर,
मन भावों में खोता ।
लीन हो गई ब्रह्म में सहसा,
उस देवी की तान।।



धूप ने पिया जब फूलों का अर्क
भर गयी ऊर्जा उसके तन-बदन में....
कल तक नजर आती थी जो कृश और कुम्हलाई
आज कैसी खिल गई है...
वसंत के आने की खबर उसको भी मिल गयी है !

आज बस इतना ही
सादर

12 टिप्‍पणियां:

  1. लता जी को नमन
    सुरांजली और शब्दांजली से सजी उम्दा प्रस्तुतिकरण

    जवाब देंहटाएं
  2. लता जी को विनम्र श्रद्धांजलि! सुंदर भजन, मनोहर गीत और पठनीय रचनाओं से सजी प्रस्तुति, आभार!

    जवाब देंहटाएं
  3. सुंदर प्रस्तुति ।
    सुर और शब्दों का संगम बेहतरीन ।

    जवाब देंहटाएं
  4. असाधारण प्रस्तुति!
    स्वर सम्राज्ञी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ सुंदर बसंती रचना एं । सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए हृदय से आभार।
    सादर सस्नेह।
    मीना जी की शारदे स्तुति बहुत सुंदर मधुर।

    जवाब देंहटाएं
  5. मेरी रचना और बिटिया संचिता के सुरों को पाँच लिंकों में स्थान देने हेतु बहुत बहुत आभार।
    हम सभी लताजी को सुनते सुनते इस उम्र तक पहुँचे हैं, उनके गीतों के भावों से कभी ना कभी हम सबके मनोभाव जुड़े होंगे और आगे भी जुड़ेंगे। जो सम्मान लताजी ने अर्जित किया वह बिरलों को ही मिल पाता है।
    श्रद्वासुमन समर्पित।

    जवाब देंहटाएं
  6. हर रचना सराहनीय । श्रमसाध्य प्रस्तुति के लिए आपको नमन ।
    स्वर साम्राज्ञी आदरणीय लता मंगेशकर जी को मेरा सादर नमन ।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत बढ़िया प्रस्तुति प्रिय दीदी। लता जी का जाना बहुत पीड़ादायक रहा। पर मृत्य जीवन का शाश्वत सत्य है और कोई भी इससे बच नहीं पाया। लता जी ने भरपूर जीवन जिया और अकल्पनीय उपलब्धियां हासिल की। एक आम लड़की ने अपनी कला और सादगी भरे व्यक्तिव से स्वयं को उस ऊंचाई पर पहुंचाया, जहां तक ना कोई पहुंच पाया न पहुंच पाने की सोच सकता है। अपने गीतों के जरिए वे सदैव अमर रहेंगी। पीढ़ियों ने उनको सुना और भावी पीढ़ियां सुनती रहेंगी। स्वर कोकिला की पुण्य स्मृति को सादर नमन। आज के गुणी रचनाकारों को बधाई। आपको साधुवाद और शुभकामनाएं 🙏🌷🌷💐💐

    जवाब देंहटाएं

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