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मंगलवार, 17 मार्च 2020

1705 ...जब कि मिलावट से बने रोज़ यहाँ सरकार

सादर अभिवादन
आज डबल काम करना पड़ रहा है
 सांध्य दैनिक मुखरित मौन की सोमवारीय प्रस्तुति
और मंगल की मौजूदा प्रस्तुति
कोशिश कर रहे हैं ..रचनाओँ की पुनरावृत्ति न हो


क्या अपन सीधे रचनाओँ की ओर चल सकते हैं ...


अधिकार की परिभाषा ..श्वेता सिन्हा

जब देखती हूँ
अपनी शर्तों पर
ज़िंदगी जीने की हिमायती
माता-पिता के
प्रेम और विश्वास को छलती,
ख़ुद को भ्रमित करती,
अपनी परंपरा, भाषा और संस्कृति को




वो लड़की ...आत्म मुग्धा
एक चंचल सी लड़की
जिसका सेंस ऑफ ह्यूमर गजब है
जिसकी स्याही से निकले शब्द
न जाने कितनों के आँसू है
जो मिट्टी की महक
अपनी कविताओं में भर देती है
जो छूट गयी बातों के बीज
सबके मनों में बो देती है


देना ...अनीता जी

बादल बनकर बरसें नभ से 
यह तो हो नहीं सकता 
क्यों न उड़ा दें सारी वाष्प मन से 
वाष्प जो कर देती है असहज 
नहीं आता रवि किरणों सा 
फूलों को खिलाना 
तो क्या हुआ 


दोहरा मापदंड .... व्याकुल पथिक

" परंतु मम्मी अभी तो थोड़ी देर पहले ही आप  रामू काका को मिलावटखोर कह डाँट रही थी। मैंने घर में प्रवेश करते हुये सुना था। कठिन परिश्रम के कारण काका के ढीले पड़े कंधे, आँखों के नीचे गड्ढे और माथे पर शिकन भी आपको भला कहाँ दिखे थे। क्या उनकी धन-लिप्सा निखिल भैया से अधिक है। यह कैसा दोहरा मापदंड है आपका..!"
....
एक सौ बारहवा विषय
मिलावट
उदाहरण

मिलावट ही मिलावट..
रिश्तों मे भी प्यार मिलावट,
सुख के साथी यार मिलावट,
दुख मे साथ कुछ ही चलते हैं,
बाकी सब संसार मिलावट.

संसद मे भी बात मिलावट,
वादों के हालात मिलावट,
सत्ताधारी,निज हितकारी,
नेताओं की जात मिलावट.
- विनोद कुमार पांडेय

अंतिम तिथिः 21 मार्च 2020
प्रकाशन तिथिः 23 मार्च 2020
माध्यमः सम्पर्क फार्म
सादर







11 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर अंक

    मिलावटी, दिखावटी और सजावटी

    इन तीन शब्दों का मैं बचपन से ही विरोधी रहा हूँ। ननिहाल का एक प्रसंग मुझे आज भी याद है कि डाइनिंग टेबल पर खाना खाते समय प्लेट पर चम्मच और मुँह से भोजन चबाने की आवाज नहीं आए, इस निर्देश का पालन करने की जगह मैंने बड़े लोगों के घर जाना ही बंद कर दिया।

    मेरे विचार से समाज को क्षति ये तीन शब्द ही वास्तव में पहुंँचा रहे हैं। यदि हम किसी के प्रति अत्यंत आदर भाव रखते हैं। हृदय में उसे अपना आदर्श समझते हैं। लेकिन जब उसका वास्तविक चेहरा सामने आता है ,तो मन उतना ही अधिक आहत हो जाता है और हम स्वयं पर से विश्वास खो बैठते हैं।
    हम टूट कर बिखर जाते हैं ,लेकिन जिसके कथनी और करनी में फ़र्क है वह उसे कोई अंतर नहीं पड़ता।
    मेरे सृजन दोहरा मानदंड को इस प्रतिष्ठित पटल पर स्थान देने के लिए आपका हृदय से आभार यशोदा दी सभी रचनाकारों को मेरा प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  2. सस्नेहाशीष व असीम शुभकामनाओं के संग श्रम साध्य कार्य के लिए साधुवाद

    जवाब देंहटाएं
  3. डबल काम के लिए बधाई और शुभकामनायें यशोदा जी, पठनीय रचनाओं से सजी हलचल ... आभार मुझे भी स्थान देने हेतु !

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति यशोदा बहन ।

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  6. सराहनीय लिंकों से युक्त बहुत सुंदर प्रस्तुति दी।
    आपकी कर्मठता अनुकरणीय है।
    हमक़दम का विषय रोचक है।
    आपके असीम स्नेह के लिए आभार लिखना घृष्टता होगी।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  7. सराहनीय प्रस्तुति

    साधुवाद

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर मिलावट रचनाओं का। आपकी ऊर्जा अथाह है।🙏🙏🙏

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत प्यारा अंक आदरणीय दीदी | आपने अछि रचनाओं का चयन किया है , हाँ मिलावट विषय कुछ रुखा सा है | अभी बहुत विषय शेष हैं | कुछ नया भी करिए चित्र पहेली अथवा एक पंक्ति पर सृजन |सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं| सादर -

    जवाब देंहटाएं

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