सादर अभिवादन
आज डबल काम करना पड़ रहा है
सांध्य दैनिक मुखरित मौन की सोमवारीय प्रस्तुति
और मंगल की मौजूदा प्रस्तुति
कोशिश कर रहे हैं ..रचनाओँ की पुनरावृत्ति न हो
क्या अपन सीधे रचनाओँ की ओर चल सकते हैं ...
अधिकार की परिभाषा ..श्वेता सिन्हा

जब देखती हूँ
अपनी शर्तों पर
ज़िंदगी जीने की हिमायती
माता-पिता के
प्रेम और विश्वास को छलती,
ख़ुद को भ्रमित करती,
अपनी परंपरा, भाषा और संस्कृति को
वो लड़की ...आत्म मुग्धा
एक चंचल सी लड़की
जिसका सेंस ऑफ ह्यूमर गजब है
जिसकी स्याही से निकले शब्द
न जाने कितनों के आँसू है
जो मिट्टी की महक
अपनी कविताओं में भर देती है
जो छूट गयी बातों के बीज
सबके मनों में बो देती है
देना ...अनीता जी

बादल बनकर बरसें नभ से
यह तो हो नहीं सकता
क्यों न उड़ा दें सारी वाष्प मन से
वाष्प जो कर देती है असहज
नहीं आता रवि किरणों सा
फूलों को खिलाना
तो क्या हुआ
दोहरा मापदंड .... व्याकुल पथिक

" परंतु मम्मी अभी तो थोड़ी देर पहले ही आप रामू काका को मिलावटखोर कह डाँट रही थी। मैंने घर में प्रवेश करते हुये सुना था। कठिन परिश्रम के कारण काका के ढीले पड़े कंधे, आँखों के नीचे गड्ढे और माथे पर शिकन भी आपको भला कहाँ दिखे थे। क्या उनकी धन-लिप्सा निखिल भैया से अधिक है। यह कैसा दोहरा मापदंड है आपका..!"
....
एक सौ बारहवा विषय
मिलावट
उदाहरण
मिलावट ही मिलावट..
रिश्तों मे भी प्यार मिलावट,
सुख के साथी यार मिलावट,
दुख मे साथ कुछ ही चलते हैं,
बाकी सब संसार मिलावट.
संसद मे भी बात मिलावट,
वादों के हालात मिलावट,
सत्ताधारी,निज हितकारी,
नेताओं की जात मिलावट.
- विनोद कुमार पांडेय
अंतिम तिथिः 21 मार्च 2020
प्रकाशन तिथिः 23 मार्च 2020
माध्यमः सम्पर्क फार्म
सादर
आज डबल काम करना पड़ रहा है
सांध्य दैनिक मुखरित मौन की सोमवारीय प्रस्तुति
और मंगल की मौजूदा प्रस्तुति
कोशिश कर रहे हैं ..रचनाओँ की पुनरावृत्ति न हो
क्या अपन सीधे रचनाओँ की ओर चल सकते हैं ...
अधिकार की परिभाषा ..श्वेता सिन्हा

जब देखती हूँ
अपनी शर्तों पर
ज़िंदगी जीने की हिमायती
माता-पिता के
प्रेम और विश्वास को छलती,
ख़ुद को भ्रमित करती,
अपनी परंपरा, भाषा और संस्कृति को
वो लड़की ...आत्म मुग्धा
एक चंचल सी लड़की
जिसका सेंस ऑफ ह्यूमर गजब है
जिसकी स्याही से निकले शब्द
न जाने कितनों के आँसू है
जो मिट्टी की महक
अपनी कविताओं में भर देती है
जो छूट गयी बातों के बीज
सबके मनों में बो देती है
देना ...अनीता जी

बादल बनकर बरसें नभ से
यह तो हो नहीं सकता
क्यों न उड़ा दें सारी वाष्प मन से
वाष्प जो कर देती है असहज
नहीं आता रवि किरणों सा
फूलों को खिलाना
तो क्या हुआ
दोहरा मापदंड .... व्याकुल पथिक

" परंतु मम्मी अभी तो थोड़ी देर पहले ही आप रामू काका को मिलावटखोर कह डाँट रही थी। मैंने घर में प्रवेश करते हुये सुना था। कठिन परिश्रम के कारण काका के ढीले पड़े कंधे, आँखों के नीचे गड्ढे और माथे पर शिकन भी आपको भला कहाँ दिखे थे। क्या उनकी धन-लिप्सा निखिल भैया से अधिक है। यह कैसा दोहरा मापदंड है आपका..!"
....
एक सौ बारहवा विषय
मिलावट
उदाहरण
मिलावट ही मिलावट..
रिश्तों मे भी प्यार मिलावट,
सुख के साथी यार मिलावट,
दुख मे साथ कुछ ही चलते हैं,
बाकी सब संसार मिलावट.
संसद मे भी बात मिलावट,
वादों के हालात मिलावट,
सत्ताधारी,निज हितकारी,
नेताओं की जात मिलावट.
- विनोद कुमार पांडेय
अंतिम तिथिः 21 मार्च 2020
प्रकाशन तिथिः 23 मार्च 2020
माध्यमः सम्पर्क फार्म
सादर
