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बुधवार, 24 अप्रैल 2019

1377..कातिबों के क़सीदे से तहरीर निखरती है..


।।प्रात:वंदन।।
"बारूद के बदले हाथों में आ जाए किताब तो अच्छा हो
ऐ काश हमारी आँखों का इक्कीसवाँ ख़्वाब तो अच्छा हो"
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर..
(23/4/19)
विश्व पुस्तक दिवस पर ..
"किताबों की सोहबत में तकदीर संवरती है
कातिबों के क़सीदे से तहरीर निखरती है"

अब नज़र डालें आज की पेशकश पर.
.जिनमें रचनाकारों,ब्लॉग के नाम क्रमानुसार है..


काव्य धारा,

दिलबाग सिंह 'विर्क'जी,

सरोकारनामा,

जज़्बात,
दिगंबर नासवा जी..✍

                                               
                                         

बड़ी हसरत से तकती है

महीनों अब मुलाक़ातें नही होती

जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थी 
अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के परदे पर 
बड़ी बैचेन रहती है किताबें 
उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है



जो ग़ज़लें वो सुनाती थी कि जिनके शल कभी गिरते नही थे

जो रिश्तें वो सुनाती थी वो सारे उधड़े-उधड़े है

कोई सफ़्हा पलटता हूँ तो इक सिसकी निकलती है..


🌸🌸

                                               

वाह-रे-वाह मेरी तक़दीर, तू भी ख़ूब रही। 



हालातों को बदलने की कोशिशें करता रहा 

हर बार हारा मैं, हर बार हाथ आई बेबसी। 



कभी किसी नतीजे पर पहुँचा गया न मुझसे 

अक्सर सोचता रहा, कहाँ ग़लत था, कहाँ सही। 

🌸🌸
                                               
आज़म , अब्दुल्ला , आम्रपाली , अनारकली 
और जयाप्रदा की ख़ाकी चड्ढी का चुनाव

आज़म खान ने पहले जयाप्रदा की चड्ढी का खाकी रंग बताया था। चुनाव आयोग से माफ़ी मांगने और बैन भुगतने के बाद अब जयाप्रदा को आम्रपाली कह दिया है। आम्रपाली मतलब नगर वधू । नगर वधू मतलब तवायफ़। वेश्या। बाप तो बाप बेटा सुभान अल्ला।


🌸🌸
                                               

पहचान कर

बयान देकर वापस लेने के ट्रेंड को

माँ-बहन की अनगिनत गालियाँ
दे डाली मैंने अपने फ्रेंड को
सोचा था मैं उसको
सरप्राईज दूंगा
बाद में अपनी गालियाँ
वापस ले लूंगा,
गालियाँ सुनकर
उसका ब्लडप्रेशर बढ़ गया

🌸🌸

                                               



कभी वो भूल से आए कभी बहाने से  

मुझे तो फर्क पड़ा बस किसी के आने से



नहीं ये काम करेगा कभी उठाने से

ये सो रहा है अभी तक किसी बहाने से



लिखे थे पर न तुझे भेज ही सका अब-तक

मेरी दराज़ में कुछ ख़त पड़े पुराने से

🌸🌸

हम-क़दम का नया विषय
🌸🌸
।।इति शम।।

धन्यवाद

15 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात..
    बेमिसाल अंक..
    साधुवाद..
    सादर...

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह! बहुत खूबसूरत और सार्थक रचनाओं का संकलन इस कड़ी में! बधाई और आभार!!!

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही बढ़िया और सुंदर प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर हलचल का संकलन
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  6. बारूद के लिए किताब आ जाये हाथों में ... वक अच्छा सच्चा विचार है ...
    अच्छा संकलन आज की रचनाओं का ... आभार मेरी रचना को शामिल करने के लिए ...

    जवाब देंहटाएं
  7. वाहह्हह... अति सराहनीय रचनाओं से सजा सुंदर संकलन है पम्मी जी...।

    जवाब देंहटाएं
  8. वाह बहुत सुन्दर संकलन सुंदर भुमिका लाजवाब लिंकों का चयन । सभी रचनाकारों को बधाई ।

    जवाब देंहटाएं
  9. कभी न प्रेम के बंधन को आज़माना यूँ
    के टूट जाते हैं रिश्ते यूँ आज़माने से
    तुझे छुआ तो हवा झूम झूम कर महकी
    पलाश खिलने लगे डाल के मुहाने से
    बहुत ही सराहनीय पठनीय सामग्री के साथ सुंदर अंक प्रिय पम्मी जी | हार्दिक बधाई सभी रचनाकारों के लिए | आपको भी सस्नेह शुभकामनायें और आभार विचारणीय लिंकों तक पहुँचाने के लिए |

    जवाब देंहटाएं
  10. उम्दा पठनीय लिंको का संकलन, शानदार प्रस्तुति करण...

    जवाब देंहटाएं
  11. Wah बेहतरीन सुन्दर संकलन किताबें साक्षात ज्ञान का भंडार होती हैं

    जवाब देंहटाएं

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