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गुरुवार, 16 मार्च 2017

608......खुजली ‘उलूक’ की

सादर अभिवादन
हिन्दी वर्ष का अंतिम उत्सव के साथ
समापन हो रहा है...
बेसब्री से प्रतीक्षा है 
मातेश्वरी का
हिन्दू नव-वर्ष की अग्रिम शुभ कामनाएँ

आज की पसंदीदा रचनाएँ.........

आज पहली बार प्रवेश कर रहे हैे
श्री ध्रुव सिंह जी "एकलव्य"



डर लगता है फिर वही,
आँखें मूंदने से 
सपनें देखने से  
उनके टूटने से 
अश्क गिरने से
अरमान बहने से
दरिया बनने से

ओ हसीन तन्हा चाँद
ओ झिलमिल सितारों
उतर आओ जमीं पर
रात के खामोश दामन पर
महफिल हम जमायेगे
चंदा तुम फूलों को चूमकर
अपनी दिल की बात कहना


चतुर एकलव्य..........शोध छात्रा हेमलता यादव
निषाद-पुत्र
एकलव्य का
दाहिना अंगूठा आज
तक नहीं उग पाया।
गुरु द्रोण
जो उच्चवर्ण के
एकाधिकार संरक्षण हेतु
मांगा था आपने।

इस शहर के लोग..........डॉ.टी.एस.दराल  
लोग पैट पालने का शौक तो पाल लिया करते हैं ,
लेकिन पैट का पेट फुटपाथ पर साफ़ कराते हैं जिस पर खुद चला करते हैं।
फिर कहीं पैर में पैट का पेट त्याग न लग जाये ,
इस डर से इस शहर में लोग सर उठाकर नहीं , सर झुकाकर चला करते हैं।


किस लिए............आशा सक्सेना
आपने क्रोध जताया
किस लिए
डाटने में मजा आया
इसलिए
या हमने कुछ
गलत लिया इसलिए

post-feature-image
मेरा 'अंश' आगे बढ़ा !!!....... ज्योति देहलीवाल
हां दोस्तो, 11 मार्च 2017 का दिन मेरे लिए एक विशेष खुशी का पैगाम लेकर आया। इस दिन मैं एक नन्हीं सी परी की नानी बन गई, नानी...! कितना अच्छा लगता है न यह संबोधन! विश्वास ही नहीं होता...कल तक जो खुद एक बच्ची थी, वो आज इतनी बड़ी हो गई कि एक बच्ची की माँ बन गई! कभी-कभी मन में विचार आता है कि जिस लड़की से यदा-कदा बुखार आने पर क्रोसिन की एक गोली गिटक के नहीं होती थी...वो लड़की डिलीवरी में इतनी गोलियां कैसे गिटकती होगी? कैसे सहन किया होगा उसने इतना दर्द? उसकी नॉर्मल डिलीवरी हुई है। उस वक्त तो बहुत दर्द होता है...कैसे सहा होगा ये दर्द मेरी बच्ची ने?

अब और नहीं...........ऋता शेखर 'मधु'
भोजन का वक्त हो चुका था| देवरानी अन्दर देखने आई तबतक उर्मिला जी माँड पसा रही थीं| उत्सुकतावश देवरानी ने वह कागज उठा लिया| पढ़ते ही स्याह हो गई| फिर खुद को संयत करते हुए बोली, ‘’जिज्जी, अब इस उम्र में नौकरी....’’ ‘’छोटी, देख , इस काठ की हाँडी में मैने चावल पकाया है| आगे यह हाँडी नहीं चढ़ेगी|’’ ‘’जी, जिज्जी’’ समझदार देवरानी, जेठानी के स्वाभिमान से दीप्त चेहरे को पढ़कर चुप रह गई|


बात पते  की....डॉ सुशील जोशी

इस बार
वो भी
देशभक्तों
के साथ
आ रहे हैं
समझा रहे हैं

समझिये
देश भक्त
देशभक्ति
चुनाव और
लोगों की
सक्रियता

....
इजाजत मांगती है यशोदा
सादर












11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर संकलन👌
    मेरी रचना को मान देने के लिए आभार बहुत सारा आपका यशोदा जी🙏

    जवाब देंहटाएं
  2. सुप्रभात सुंदर संकलन आभार आपका

    जवाब देंहटाएं
  3. सुप्रभात
    बहुत सुन्दर और सार्थक लिंको का चयन

    जवाब देंहटाएं
  4. सुन्दर प्रस्तुति। आभार यशोदा जी खुजली ‘उलूक’ की को स्थान देने के लिये।

    जवाब देंहटाएं
  5. सुंदर संकलन। पांच लिंकों का आनन्द में" में मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, यशोदा जी!

    जवाब देंहटाएं
  6. अपनी अनमोल रचनाओं के संग्रह में मेरी रचना "डर लगता है आज भी" को स्थान देने के लिये आपका ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ। "एकलव्य"

    जवाब देंहटाएं
  7. धन्यवाद यशोदा जी मेरी रचना शामिल करने के लिए आज के पांच लिंकों के आनंद में |

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति ....

    जवाब देंहटाएं
  9. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं

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