पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

समर्थक

शनिवार, 9 जनवरी 2016

एक खबर




सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष


कब मिला है , जितना मिलना चाहिए 
कुर्सी से चिपकते , सब भूल जाते हैं ...


‪सच्चाई का जुनूँ उतरते ही हम ‪मालामाल हुए |
हर सूँ यही हवा है ‪रिश्वत हर ताली ताली है ||

वो ‪सावन के अंधे हैं उनसे मत पूँछो रुत का हाल |
उनकी खातिर हवा ‪रसीली चारों सूँ ‪हरियाली है ||





तेरी वहशत , तेरी उम्मीदें और तेरे ख्याल
तेरी हसरत , तेरी यादें और तेरे ख़्वाब

बड़ी मसरूफियत रहती है , इन दिनों मुझे





पिछले दिनों हमने अपनी ’ई-बुक’ बनाई- ’पुलिया पर दुनिया’।
इस किताब में हमने ’सर्वहारा पुलिया’ पर बैठे लोगों से बातचीत करते हुये 
जो पोस्ट फ़ेसबुक पर अपलोड की थीं उनको इकट्ठा करके किताब बना डाली। 
अपलोड कर दी। अब इसको लोग आनलाइन खरीद सकते हैं। 
अभी तक कुल 44 किताबें बिक चुकी हैं।




इस खबर में उसका भी जि‍क्र करना चाहता हूं
खबर के अंदर तस्‍वीरें भी डालना चाहता हूं
उन पलों की जि‍न्‍हें मैं जी ना पाया
जि‍नको जीने की उतनी शि‍द्दत थी
जि‍नको जीना जीने की इक इबादत थी




तेरा अपना खाली कुठला
थोड़ी-सी अकल काम ले
अब तो मेरे भाई!
पकी फसल की मेंढ़ों पर
सींग उठाकर डट जा




बेहतर होगा, सब बेहतर होगा, 
आपको मेरी है सलाह, 
माता पीता के प्यार के लिए, 
हमेशा करें प्रयास, 
फिर तो मिल जायेगा,






सच तो यहीं है की ना मुझे ठीक से हिन्दी आती है, ना कोई अंग्रेजी का अख़बार बिना रुके पढ़ सकता हूँ | अटक-अटक कर पढ़ने के बाद भी तर्क और तुक्के पर पूरी तरह निर्भर रहता हूँ | 
मुझे अपनी बात ज्यादा लोगों तक पहुँचानी है और कई भाषाओँ का अच्छा ज्ञान 
एक तरह से मददगार या वरदान सिध्द हो सकता है | 
लेकिन मुझे इसके लिए बहुतों की नाराज़गी सहनी होगी फिर भी मुझे उनकी परवाह है, 
वो मेरी बात ना समझें पर मैं उनकी कहीं हर बात समझता रहूँगा |



फिर मिलेंगे ...... तब तक के लिए 

आखरी सलाम

विभा रानी श्रीवास्तव


4 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात
    माता पिता के प्यार
    बेहतर होगा, सब बेहतर होगा,
    आपको मेरी है सलाह,
    माता पिता के प्यार के लिए,
    हमेशा करें प्रयास,
    फिर तो मिल जायेगा,
    .....
    प्यार करेंगे तभी न मिलेगा
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया हलचल प्रस्तुति हेतु आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति , मेरे ब्लॉग पोस्ट को शामिल करने हेतु आपका हार्दिक आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुंदर लिंक संकलन...
    आभार।

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...