पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

समर्थक

शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

189...नाप - तोल सही होने पर मुख खोलो

शुभ प्रभात 
आज मैं मुखातिब हूँ
आपके समक्ष..
सहन कर लीजिएगा मुझे
व मेरी पसंदीदा रचनाओं को..

काश उजालों की चाहत ना होती,
काश अन्धेरा उदास ना होता!
इतना शोर सीने में  क्यों  हे,
काश सन्नाटा बाहर  ना होता !

प्रत्येक  माँ - बाप चाहते है कि उनके बेटे/ बेटी पढ कर नाम रोशन करे । 
लेकिन कुछ ऐसे  कारण होते है छिपे कि विद्यार्थी  चाहते हुए भी  पढाई नही कर पाते है । 
उनका दिल तो पढने को  करता है , लेकिन  उनका मन पढाई मे नही लगता है।
 मन ना लगे तो क्या करे।

व्याकरण पढ़ो भाषा शुद्ध करो ,
मौखिक लिखित से विचार व्यक्त करो |
मौखिक में अशुद्धता है कम बोलो ,
बोलने से पहले बार -बार तोलो |
नाप - तोल सही होने पर मुख खोलो ,

श्रम लिखते
माँ, भू-लाल के भाल
स्वेद क्षणिका
और
वंश उऋणी
बीजती माता जाई
बीज संस्कारी

मृत पति संग
चिता पर जलाई गई
पांच पतियों समुख
निर्वस्त्र की गई
श्राप देकर पाषाण बनाई गई 
वो नारी थी।

जुदा हो करके के तुमसे अब ,तुम्हारी याद आती है
मेरे दिलबर तेरी सूरत ही मुझको रास आती है
कहूं कैसे मैं ये तुमसे बहुत मुश्किल गुजारा है
भरी दुनियां में बिन तेरे नहीं कोई सहारा है


अंतिम पसंदीदा रचना है मेरी आज की

अब राखें चिंघाड़ेंगी क्या पस्त हो
ख़त्म कर सब कहानी पवन खेलकर
मातम पर हँसता हुआ चल दिया
क्रूर विध्वंस कर नाद से बेखबर


कुलदीप भाई  की एक उपलब्धि
पांच लिंकों का आनंद के लिये एक android App. बनाने का प्रयास किया है।  
जिस का लिंक है। 
https://dl.dropboxusercontent.com/u/22664705/_bloghalchal.apk 

आप इसे भी install करके देखें। बताएं कि ये कितना उपयोगी हो सकता है।

दें इज़ाजत
वक्त मिला तो
फिर मिलेंगे
सादर
दिग्विजय







12 टिप्‍पणियां:

  1. Good Morning... App. Installed...working success fully...Thanks to kuldeep

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभ प्रभात..
    अच्छी रचनाएं चुनी आपने
    अधिकांश रचनाओं के ब्लाग पहली बार
    इस अंक के साथ जुड़े हैं
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुप्रभात
    बहुत सुंदर
    लिंक शामिल करने के लिए धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर प्रयास आपके द्वारा. धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  5. धन्यवाद मेरी रचना को जगह देने के लिए।

    उत्तर देंहटाएं
  6. भाई साहब आप अधिक व्यस्तता के चलते भी....
    कभी कभी आनंद को अपना
    अमुल्य सहियोग देना नहीं भूलते...
    आभार आप का...
    बहुत अच्छा लगता है...
    आप की प्रस्तुति पढ़कर...
    आज भी प्रस्तुति पढ़कर मन आनंदित हुआ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. बढ़िया हलचल प्रस्तुति हेतु आभार!

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...