शुभ प्रभात
आज मैं मुखातिब हूँ
आपके समक्ष..
सहन कर लीजिएगा मुझे
सहन कर लीजिएगा मुझे
व मेरी पसंदीदा रचनाओं को..
काश उजालों की चाहत ना होती,
काश अन्धेरा उदास ना होता!
इतना शोर सीने में क्यों हे,
काश सन्नाटा बाहर ना होता !
प्रत्येक माँ - बाप चाहते है कि उनके बेटे/ बेटी पढ कर नाम रोशन करे ।
लेकिन कुछ ऐसे कारण होते है छिपे कि विद्यार्थी चाहते हुए भी पढाई नही कर पाते है ।
उनका दिल तो पढने को करता है , लेकिन उनका मन पढाई मे नही लगता है।
मन ना लगे तो क्या करे।
व्याकरण पढ़ो भाषा शुद्ध करो ,
मौखिक लिखित से विचार व्यक्त करो |
मौखिक में अशुद्धता है कम बोलो ,
बोलने से पहले बार -बार तोलो |
नाप - तोल सही होने पर मुख खोलो ,
श्रम लिखते
माँ, भू-लाल के भाल
स्वेद क्षणिका
और
वंश उऋणी
बीजती माता जाई
बीज संस्कारी
मृत पति संग
चिता पर जलाई गई
पांच पतियों समुख
निर्वस्त्र की गई
श्राप देकर पाषाण बनाई गई
वो नारी थी।
जुदा हो करके के तुमसे अब ,तुम्हारी याद आती है
मेरे दिलबर तेरी सूरत ही मुझको रास आती है
कहूं कैसे मैं ये तुमसे बहुत मुश्किल गुजारा है
भरी दुनियां में बिन तेरे नहीं कोई सहारा है
अंतिम पसंदीदा रचना है मेरी आज की
अब राखें चिंघाड़ेंगी क्या पस्त हो
ख़त्म कर सब कहानी पवन खेलकर
मातम पर हँसता हुआ चल दिया
क्रूर विध्वंस कर नाद से बेखबर
कुलदीप भाई की एक उपलब्धि
पांच लिंकों का आनंद के लिये एक android App. बनाने का प्रयास किया है।
जिस का लिंक है।
https://dl.dropboxusercontent. com/u/22664705/_bloghalchal.ap k
आप इसे भी install करके देखें। बताएं कि ये कितना उपयोगी हो सकता है।
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दें इज़ाजत
वक्त मिला तो
वक्त मिला तो
फिर मिलेंगे
सादर
दिग्विजय
दिग्विजय






