सादर अभिवादन।
गुरुवारीय अंक में आपका स्वागत है।
हम
शांति-सौहार्द की
नींव रखते
चले आए हैं,
दुनिया में
कहीं
नींव उखाड़ते
लोग लहूलुहान
नज़र आए हैं।
-रवीन्द्र
आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-
बहुत प्रयास किये गए थे
प्राणों की आहुती भी दी थी कितनों ने
जो अब फलीभूत हुई है
अब प्रतिफल मिला है इस रूप में |
घर-घर दीप जलाएंगे.... अनुराधा चौहान
सरयु
किनारे भव्य राम का
मंदिर
होगा अति सुंदर।
राम
लला तंबू से उठकर
पहुँचेंगे
घर के अंदर।
सदियों
का वनवास भोग के
राम
लला घर आएंगे।
तिरंगे का करें सम्मान आँखों पे... रेखा जोशी
करें हम नमन भारत के जवानों को
शहीदों
का रखेंगे मान आँखों पे
करेंगे
खत्म घोटाले सभी मिल कर
रखेंगे
देश का अभिमान आँखों
पे
बेटी का विवाह नहीं हो पाता, दूल्हा कौन खोजे, इंतजाम कौन करे? सामाजिक रूप से उनका कोई पालनहार नहीं।
अब
क्या हो? क्या वे दोनो आत्महत्या
कर लें जो कि पड़ोसी
चाहते हैं, ताकि उनका घर हड़पा जा
सके. मां 60वर्ष से ज्यादा की
है और बेटी 40 के
आसपास। उम्र साथ छोड़ रही है....
समाज
भी... संकट गहरा है और हितैषी
न के बराबर। अब
रसोई के सारे कनस्तर
खाली हैं और भरने वाला
कोई नहीं...
कोई
कुछ करेगा क्या????
कोरोना के इफेक्ट्स और बचने के उपाय --डॉ. टी.एस. दराल
एक घंटा पसीना बहाकर तन और मन दोनों चुस्ती और स्फूर्ति से भर जाते थे। सभी मित्रों और रिश्तेदारों से दूर लॉक डाउन में घर में बंद रहकर, मानसिक तनाव और बेचैनी होना भी एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। ऐसे में बहुत से लोगों को मानसिक विकार पैदा हो जाते हैं। चिड़चिड़ापन, नींद न आना , बात बात पर झगड़ना आदि हरकतें इस दौरान बहुत देखने में आईं। इससे बचने के लिए आवश्यक होता है कि आप अपने आप को व्यस्त रखें, कुछ ऐसे काम करें जो समय के आभाव में पहले नहीं कर पा रहे थे, नए शौक बनायें या पुराने शौक पूरे करें।
हम-क़दम का एक सौ तीसवाँ विषय
आज बस यहीं तक
फिर मिलेंगे आगामी मंगलवार।
रवीन्द्र सिंह यादव


