सादर अभिवादन।
आज महात्मा गाँधी जी की पुण्यतिथि है।
बापू को हमारा शत-शत नमन।
चित्र साभार :गूगल
विचारोत्तेजकता का
माहात्म्य
संवाद की
अस्पष्टता के दौर में,
निखिल भूमण्डल पर
छाये हैं
छल-दंभ-झूठ के
गर्द-ओ-गुबार।
-रवीन्द्र सिंह यादव
आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाएँ-

तू ही अभिमान !
हर लो तम और
जला दो ज्ञान की
ज्योति अविराम !

अमराइयों में कोयल कुहुके
उपवन सज गए पुष्प गुच्छ से
चंग थाप से गूंजी गलियां
रंगोत्सव आया
मधुमास धरा पे छाया….

स्वर- सरिता तुझसे ही फ्लावन
छवि तेरी मोहक - मनभावन
भाव मधुर भर दे
मां तू कृपा कर दे ।

कुत्ते को रख लूँगी नौकर ,मूषक ढूँढ वो लाएगा ।
उसने मेरी बात मानी ,तो वह जूते खाएगा ।।
मालकिन की बात को टाले,उसकी ऐसी नहीं मज़ाल ।
नहीं बचेगा मेरे हाथों ,अगर करेगा टालम-टाल ।।
शुद्ध भाव प्रदायिनी,हस्त पुस्तक वाहिनी
सद्बुद्धि विद्या दायिनी,लेखनी सँवार दे ।
वेद की तुम स्वामिनी,निर्मल मृदुभाषिणी,
हृदय में प्रीत भर, जीवन को तार दे ।

बदल
जाता है
होंठों
के बीच
दाँतों से
निकलती
हवा में
रह
जाती हैंं
कुछ
आवाजें
फुस्स फिस्स
जैसी
और
आवाजों
के अर्थ
हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए
यहाँ देखिए
आज बस यहीं तक
फिर मिलेंगे अगले गुरूवार।
रवीन्द्र सिंह यादव