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मंगलवार, 28 जनवरी 2020

1656...साधारण सा मंगलवारीय अंक

सादर अभिवादन
आज हमारी बारी
तो चलिए 
माह जनवरी के 
अंतिम पड़ाव पर खड़े हैं हम..

आज की कुछ नई-जूनी रचनाओं से साक्षात्कार करें

"आओ अभी मेरी माँ से उनकी बहू होने के किस्से सुन लो.. जबतक मेरी नानी जीवित रही तभी तक मेरी माँ रानी रही..!"प्रभास नैनी को लेकर अपनी माँ के कमरे में पहुँच गया। उसकी माँ प्रतियोगिता में भेजने के लिए लघुकथा लेखन में उलझी हुई थी।



चौराहों, बाजारों  में बिकते
तिरंगे  का रंग स्वरूप आकार
जाने कब कहाँ खो गया ।
कुछ अनगढ़ हाथों  से
केसरिया से लाल तो
जाने कब का हो गया।


किया विश्वास तभी टूटा,
दिया था साथ वो छूटा।
लगी जब चोट सीने पे,
तभी दिल का भरम टूटा।
भले अब लौटकर आओ,

माँ ..... अनीता जी

माँ दुआओं का ही दूजा नाम है 
उसके दामन में सहज विश्राम है 

सर्द थीं कितनी हवाएं रोक न पायीं कभी 
नित लगीं घर काम में मुँह अंधेरे उठ गयीं 


स्त्री नदी होती है ...... रश्मि शर्मा

उस स्पर्श में कुछ ऐसा था कि लगा ढहती दीवार को सहारा देकर 
गिरने से बचाने की कोशिश है।लड़की देखना चाहती थी कि उसके 
चेहरे पर क्या लिखा है, मगर आँख उठाने की हिम्मत नहीं हुई। 
कुछ देर बाद मुड़कर देखा, पीछे तहाये गए रंग-बिरंगे कपड़ों का 
जैसे बाज़ार लगा हो।

तेरे पास ग़ाफ़िल वो शाना कहाँ है ...चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’

वे लोग उनसे आबाद ख़ाना कहाँ है
न पूछ आज बीता ज़माना कहाँ है

जो पाया उसे खोना आसान है पर
जो खोया उसे फिर से पाना कहाँ है
...
अभी खतम नहीं न हुआ है
विषय बाकी है

106 वें अंक के लिए

अभी न होगा मेरा अन्त

ये पंक्ति निराला जी की है
इन पंक्ति के भाव को पकड़ कर
रचना लिखिए


अंतिम तिथिः 01 फरवरी 2020
संपर्क फार्म चालू हो गया है
शाम तीन बजे तक
फिर मिलेंगे अगले मंगल को
सादर

12 टिप्‍पणियां:

  1. जी बिल्कुल दी,
    अंत ही आरम्भ है, महाकाली के इन शब्दों में जो आध्यात्मिक भाव निहित है निराला जी उसे समझते थें और हमें भी इसे समझना होगा ।
    बहुत सुंदर और श्रेष्ठ रचनाओं का चयन आपने आजके अंक में किया है।
    हाँ , अब जरा सरस्वती पूजन हो जाए फिर इस माह का अंत और नये माह का आरम्भ है ?
    सभी को सादर प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत बढिया अंक।सभी रचनाएँ सुंदर सरस और सराहनीय। सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत प्यारी प्रस्तुति, आभार

    जवाब देंहटाएं
  4. सस्नेहाशीष व असीम शुभकामनाओं के संग हार्दिक आभार छोटी बहना
    सराहनीय प्रस्तुतीकरण

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सराहनीय प्रस्तुति है।

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर अंक है दी।
    हमक़दम का विषय भी अलग है।
    सुंंदर प्रस्तुति।
    सादरः

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर प्रस्तुति, मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार यशोदा जी।

    जवाब देंहटाएं
  8. पठनीय रचनाओं की खबर देता अंक, मुझे भी शामिल करने हेतु शुक्रिया !

    जवाब देंहटाएं
  9. उत्कृष्ट कृतियों से सजा पटल सभी रचनाकारों को बंसत पंचमी की शुभकामनायें

    जवाब देंहटाएं
  10. उम्दा लिंकों से सजी शानदार प्रस्तुति
    सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं

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