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बुधवार, 29 जनवरी 2020

1657.. हंसी ख़ुशी की तारीखे दर्ज थी..

।। भोर वंदन।।
"फूटा प्रभात‚ फूटा विहान..
बह चले रश्मि के प्राण‚ विहग के गान‚ मधुर निर्झर के स्वर
झर-झर‚ झर-झर।
धीरे-धीरे‚
लो‚ फैल चली आलोक रेख
धुल गया तिमिर‚ बह गयी निशा;
चहुँ ओर देख‚
धुल रही विभा‚ विमलाभ कान्ति
सस्मित‚ विस्मित‚
खुल गये द्वार‚ हँस रही उषा..!!"
             भारत भूषण अग्रवाल

कहते हैं कि कलम इतिहास लिखती भी है और बनाने के संग उम्मीद भी जगाती है..
तो सस्मित, विस्मित खुल गए द्वार की आशा के साथ नज़र डाले आज की लिंकों पर..
आगे बढ़ने से पहले
 रचनाकारों के नाम क्रमानुसार पढ़ें..✍



आ० सुबोध सिन्हा जी

आ०  संजय भास्कर जी
आ० कुसुम कोठारी जी
आ० विरेन्द्र शर्मा जी
आ० डॉ. वर्षा सिंह जी

🍂🌼🍂




मिला उत्तर –
“मैं .. मैं राजतंत्र”
चौंका मैं –
“ राजतंत्र !? ... कभी भी नहीं ... आज हीं तो
अपने गणतंत्र दिवस की सालगिरह है भाई”
दरवाजे के पार कुछ खुसुर-फुसुर तभी पड़ी सुनाई
हो हैरान पूछा पुनः मैंने –
“दूसरा कौन है यार !?”
🍂🌼🍂



जिसने संभाले रखा
पुरे वर्ष उस कैलेंडर को
जिसमे हंसी ख़ुशी की
तारीखे दर्ज थी
साल बदलते रहे..
🍂🌼🍂



आज समीक्षक और आलोचक समय-समय पर ये जोर दे रहें हैं कि हिन्दी काव्य सृजन में भाषा की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए ,काव्य लेखन में अहिन्दी  शब्दों का पूर्ण त्याग किया जाए, कम से कम काव्य की प्रमुख विधाओं को परिष्कृत रखा जाए।..


🍂🌼🍂

नागरिकता तो बहाना है असल काम अल्पसंख्यकों की आड़ में भारत को टुकड़ा टुकड़ा करने का रहा आया है इसी वजह से संविधानिक संस्थाओं को अदबदाकर तोड़ा और बदनाम किया जा रहा है काला कोट बनाम खाकी वर्दी उसका एक नमूना भर था।
बाज़ जाने किस तरह हमसे ये बतलाता रहा ,
क्यों परिंदों के दिलों से उसका डर जाता..


🍂🌼🍂



निर्धन के घर में भी सुख को दावत देने वाला हो

मंहगाई पर अंकुश वाला बजट बने कुछ अब ऐसा
बिगड़ी स्थितियों को बेहतर हालत देने वाला हो..

ग़ज़ल के धागे में केन्द्रीय बजट से आम जनों के उम्मीद को पीरोने की कोशिश ..के साथ आज की बातें पुरानी ग़ज़ल के साथ यही तक..




🍂🌼🍂
हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए

🍂🌼🍂

।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍


16 टिप्‍पणियां:


  1. काव्य का उत्थान और शुद्ध हिन्दी लेखन।
    कुसुम दी का यह लेख अच्छा लगा।
    प्रस्तुति और उसकी भूमिका सदैव की तरह प्रशंसनीय रहती है आपकी ।
    सादर प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  2. शानदार प्रस्तुति...
    सादर...

    जवाब देंहटाएं
  3. व्वाहहहहह
    बेहतरीन ग़ज़ल
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  4. सभी रचनायें बहुत सुन्दर हैं मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभारी हूं!

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर प्रस्तुति पम्मी दी।
    सभी सूत्र लाज़वाब है।
    भूमिका भी बहुत अच्छी है।

    जवाब देंहटाएं
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  7. आपकी भूमिका सदा सरस और आत्मसुख देने वाली होती है पम्मी जी ।
    बहुत शानदार प्रस्तुति ।
    सुंदर लिंक चयन।
    सभी रचनाएं बहुत सुंदर।
    मेरे लेख को जगह देने के लिए बहुत बहुत आभार आपका।।
    सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  8. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं

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