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मंगलवार, 14 जनवरी 2020

1642..मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ

सादर अभिवादन
मंगल की प्रस्तुति को
बनाना भारी पड़ता है
विषय पर दिमाग काफी लगता है
और वो है नही हमारे पास
फिलहाल चलें रचनाओं की ओर ...


कैसे जीवन जीना हो? ....श्वेता सिन्हा

आशाओं के दीप बुझा के
कैसे जीवन जीना हो...?

जर्जर देह के आवरण के
शिथिल हिया के आचरण के
अवशेष बचे हैं झँझरी कुछ
कैसे अंतर्मन सीना हो...?



मकर संक्रांति पर्व है आज ।मैं कब से नीले आसमान में रंगबिरंगी बड़ी -छोटी पतंगों को इठलाते देख रहा था। उस अनंत की ऊँचाई नापने की एक मासूम सी कोशिश में जब वे मचलती ,उछलती और फड़फड़ाती हैं, तो पतंगबाज मुस्कुराते हैं।यही नहीं इन्हें आपस में लड़ाते भी है और जब कोई पतंग कट जाती है , असहाय सा नीचे की ओर गिरने लगती है । उसी दौरान विजेता के ' वह काटा- वह काटा ' के अट्टहास से आकाश गूंज उठता है।


भयंकर  सर्दी  का मौसम
चारो ओर बादल ही बादल
धुंद इतनी कि
हाथों को हाथ नहीं सूझते
जरा  दूर  खड़े वाहन भी
दिखाई न दे पाते


तिल गुड़ की रेवड़ी (Til gud ki revdi)
मकर संक्रांति या लोहडी के अवसर पर तिल के लड्डू के साथ-साथ तिल गुड़ की रेवड़ी भी बहुत बनाई और खाई जाती हैं। तिल में बहुत सारा कैल्शियम होता हैं और गुड़ आयरन का बहुत बड़ा स्त्रोत हैं। ठंडी के दिनों में तिल और गुड़ का सेवन सेहत के लिए बहुत ही लाभकारी होता हैं। तिल गुड़ की रेवड़ी बनाना बहुत ही आसान हैं सिर्फ़ सामग्री का सही अनुपात और बनाने का सही तरीका पता होना चाहिए।


आधा बरतन है भरा ,या आधा है रिक्त।
रिक्त देख मन रिक्त हो ,सिक्त देख मन सिक्त ।
सिक्त देख मन सिक्त ,करें विचार हम जैसे
जैसे होंगें भाव ,सदा फल होंगे वैसे ।
वैसे  हो अब कर्म ,नहीं हो कोई बाधा ।
बाधा होगी पार ,भरेगा  बरतन आधा ।


मुझे याद हैं
लोहड़ी की रातें
जब आग के चारों ओर
सुंदर मुंदरिये हो
के साथ गूंजते थे
खिलखिलाते मधुर स्वर

रचनाएँ यहीं तक
103 सप्ताह से आप कविता ही लिख रहे हैें
इस बार आप व्यंग्य, आलेख आदि 
लिखने की कोशिश कीजिए
अब विषय क्रमांक 104
विषय है
अंधा बांटे ???
उदाहरण की कोशिश है
अरविंद कुमार खेड़े दी का एक व्यंग्य आलेख है
जो डेली हंट मे छपा है
'सुनकर बापूजी का माथा ठनका। खोजबीन की तो पता चला, अवाम ठीक कह रही है। फिर उन्होंने इस भेदभाव को दूर करने के लिए युक्ति निकाली। क्यों न यह बाँटने का काम किसी अंधे को सौंपा जावे? वह देख ही नहीं पाएगा तो इस प्रकार के भेदभाव की संभावनाएँ ही खत्म हो जाएगी। ' बापूजी के स्वर्ग सिधारने के बाद 'सुराज' का यह कार्य आज भी अनवरत जारी है। बदला है तो सिर्फ इतना कि सारे समर्थ लोगों ने देश के सारे जरूरतमंदों को खदेड़ दिया है। और वे सब अपने-अपने सगे-संबंधियों के साथ रेवड़ी पाने अंधों के सामने खड़े हैं। दुर्भाग्य यह है कि अंधों को इसका इल्म नहीं है।वे बापूजी के सौंपे गए इस पुनीत कार्य को अपना कर्तव्य समझ निष्ठापूर्वक आज भी निर्वाह कर रहे हैं। और अवाम के लिए सुराज का यह सपना आज भी एक सपना ही बना हुआ है।' कहते-कहते दादा का दिल बैठ गया था।गला भर आया था। उन्होंने अपना चश्मा उतारा, आस्तीन से अपनी आँखें पोंछी, फिर अपना चश्मा साफ किया। रुँधे गले से कहा,'आज भी अपना बूढ़ा और अंधा गणतंत्र समझ रहा है कि,वह भेदभाव किए बिना रेवड़ी बाँट रहा है।'

प्रेषित करने की अंतिम तिथिः 18 जनवरी 2020
मेल द्वारा शाम 3.00 बजे तक
सादर





15 टिप्‍पणियां:

  1. मकर संक्रांति जिसे हम उत्तर भारतीय लोग खिचड़ी कहते हैं ,पूर्व में सदैव 14 जनवरी को मनाया जाता था। लेकिन ,इस बार यह 15 जनवरी को मनाया जाएगा , फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक लोग आज ही खिचड़ी पर्व बड़े उल्लास पूर्वक वातावरण में मना रहे हैं ।
    अतः इस पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
    हम इस सौहार्दपूर्ण वातावरण में अपनी लेखनी का उपयोग राष्ट्रहित में करें, ऐसी कामना करता हूँ। व्यर्थ के विषयों में चिकोटी काट कर जनता को उलझाना इन दिनों प्रगतिशीलता की पहचान बन गई है, खैर...।
    मेरी रचना को इस प्रतिष्ठित मंच पर सम्मान देने केलिए यशोदा दी आपका हृदय से आभार।
    पतंग और डोर से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। मैं प्रयास करूँगा कि कल अवकाश के दिन होटल के छत पर बैठ इनके माध्यम से अपने जीवन की पाठशाला को समृद्ध करूँ।

    आप सभी रचनाकारों को मेरा प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. परम्परा के अनुसार बहुत से लोग 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व मानते हैं लेकिन कतिपय पंचांगों के अनुसार मकर राशि में भगवान सूर्य 14 जनवरी की शाम 7.53 पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे लिहाजा दूसरे दिन 15 जनवरी को संक्रांति पर्व शास्त्रोचित है ।
      जबकि काशी के पंचांगों के अनुसार 15 जनवरी को प्रातः 8.24 पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे इसलिए स्नान 8.24 के बाद बताया गया है
      इस दिन पवित्र नदी में स्नान के बाद शिव मन्दिर में तिल शिवलिंग पर तिल चढ़ाना, तिल के तेल का दीपक जलाना, तिल का हवन लाभप्रद बताया गया है ।

      कतिपय पंचांगों के अनुसार पुण्यकाल-तीर्थनदियों में स्नान का पुण्यकाल प्रातः7.19 से सायं 5.40 तक है लेकिन महापुण्यकाल प्रातः 7.19 से पूर्वाह्न 9.03 तक है ।

      हटाएं
  2. वाह बेहतरीन प्रस्तुति सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
  3. उव्वाहहह..
    बेहतरीन...
    भाई रवीन्द्र जी को जन्मदिवस पर
    अशेष शुभकामनाए....
    सादर...

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति। रवीन्द्र जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐

    जवाब देंहटाएं
  5. सस्नेहाशीष संग असीम शुभकामनाएं छोटी बहना
    उम्दा लिंक्स चयन

    जवाब देंहटाएं
  6. आदरणीर रवीन्द्र जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं तथा मंच से जुड़े समस्त रचनाकारों को भी मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं ।

    जवाब देंहटाएं
  7. सुप्रभात
    उम्दा लिंक्स सारी |संक्रांति की हार्दिक शुभ कामनाएं |मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद यशोदा जी |

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर प्रस्तूति। रविन्द्र भाई को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
    मेरी रचना को 'पांच लिंकों का आनंद' में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, यशोदा दी।

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  10. मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं
    बहुत सुंदर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  11. मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ।
    सुंदर प्रस्तुति। बेहतरीन रचनाओं का चयन। सभी रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।
    'हम-क़दम' के विषय में काव्य की सीमा से आगे अन्य विधाओं की रचनाओं को समाहित करने का आग्रह रचनाकारों को नवीनता का सुखद अनुभव अवश्य देगा।

    जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिये आप सभी का तह-ए-दिल से शुक्रिया /सादर नमन।

    जवाब देंहटाएं
  12. शानदार प्रस्तुति उम्दा लिंकों का संकलन
    आप सभी को मकर संक्रांति की असीम शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  13. 🙏 मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    जवाब देंहटाएं

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