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शनिवार, 4 जनवरी 2020

1632... कविता

[01-01-2020] आयाम:साहित्य का स्त्री स्वर(व्हाट्सएप्प समूह से ) की अध्यक्ष पद्मश्री, डॉ. उषा किरण खान:- बाबा ने कहा था— नील गगन में यह जो सूरज चमक रहा है
मेरी भी आभा है इसमें!!
हम इसे न भूलें कि हम किसी से कम नहीं।

जब हम यह नहीं भूलें कि हम किसी से कम नहीं तो...
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 हर पल उल्लासित रहें/मंगलकारी रहें
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RPriyadarshi


 मैंने महसूस किया,
इस धरती सी बनना है,
तभी समयानुसार हर रूप सम्भव है,
और मैंने धरती को प्रेरणास्रोत मान,
कई हथेलियों में मिट्टी का स्पर्श दिया,
कभी प्रत्यक्ष,
कभी कलम के माध्यम से,
कभी सपनों का आह्वान करके ...
जंगल की आग,
हमारा स्वर है - 


एक भाव

अब शायद सबकुछ शांत होगा
कुछ दिनों के लिए सांत्वनाओं का एक नया प्रान्त होगा
लोग बसने को जिसमे लालायित होंगे
नए वाक्य विन्यासों से उसकी सीमाएं आयामित होंगे

कविता

केवल सिंहासन का भाट नहीं हूँ मैं
विरुदावलियाँ वाली हाट नहीं हूँ मैं
मैं सूरज का बेटा तम के गीत नहीं गा सकता हूँ |
मैं पीड़ा की चीखों में संगीत नहीं ला सकता हूँ | |

कविताएँ

क्या तुम मनुष्य हो?
-नहीं, मैं मनुष्य भी नहीं

तुम लगातार ख़ुद को शॉल से ढांपे रखती हो
और पढ़ी हुई हर कहानी को अपनी कहानी की तरह पढ़ती हो
जबकि मैंने भ्रम के स्टेशन से भ्रम को जाने वाली गाडिय़ां पकड़ीं
बीच में जितने भी स्टेशन आए सबका नाम मैंने भ्रम पाया

कविता
हांफने लगा न हो आपका हृदय अगर
जीने में इस जीवन को दुर्निवार
तो छोड़ जाइए अपना हृदय
किसी और सीने में फिर धड़कने के लिए एक बार
फिर शीरीं-फरहाद, और लैला-मजनूं की तरह
धड़कता रहेगा यह
अगर है कोई स्वर्ग
तो वहां से झांक कर देखा करेंगे जिसे आप

कविता

उनकी रसोई के बर्तनों की पवित्रता के लिए
किसी का पैदा होना दुर्घटना है
क्यों न ये सब छोड़ कर कुछ और सोचा जाए
जैसे चलता रहता है मुल्क का कारोबार वैसे ही
वर्ना वो पूछ लेंगे कि तब कहाँ थे और अब क्यों हो
लाजवाब होने से पहले

><><><
पुन: मिलेंगे...
><><><

अब बारी है विषय की
विषय क्रमांक 102
दुआ
उदाहरण
लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी
ज़िन्दगी शमा की सूरत हो ख़ुदाया मेरी।

दूर दुनिया का मेरे दम अँधेरा हो जाये
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये।
रचनाकार - मोहम्मद अलामा इक़बाल 

आज : अंतिम तिथि : 04 जनवरी 2020
प्रविष्टिया मेल द्वारा ही मान्य
प्रकाशन तिथिः 06 जनवरी 2020

8 टिप्‍पणियां:

  1. जी प्रणाम दी।
    सुप्रभात।
    बेहतरीन प्रेरक भूमिका की चौद पंक्तियों के साथ सरहनीय रचनाओं का सुंदर संकलन है आज के अंक में।
    हमेशा की तरह लाज़वाब प्रस्तुति।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  2. सदा की तरह सदाबहार अंक
    सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
  3. बेहतरीन प्रस्तुति के साथ सुंदर अंकों का संकलन।

    जवाब देंहटाएं
  4. बेहतरीन भूमिका, सुन्दर रचनाएं

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  6. प्रभावी भूमिका के साथ कविता पर विशिष्ट सामग्री के साथ आया आज का अंक बहुत शानदार है आदरणीया दीदी.
    कविता के विभिन्न आयाम एक फूल की पंखुड़ियों से प्रतीत होते हैं.
    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ.

    जवाब देंहटाएं

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