स्नेहिल नमस्कार
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आज विशेष है
अंक क्रमांंक चौदह सौ
इन पंक्तियों के लिखे जाते तक
कुल पृष्ठ दृश्य 493 268
कुल फॉलोव्हर 214
ब्लॉगसेतु रेंकिंग में नम्बर 01
ये आँकड़े हासिल हुए हैं...
आपके सहयोग और प्रेम की सदैव कामना
है।
हमारी टीम आप सभी पाठकों का
हृदयतल से आभारी है।
अपना बहुमूल्य साथ बनाये रखें।
★
खेती जो हम जमीं से आसमां तक करते हैं
उपज में बहुमूल्य रत्न जग को रौशन करते हैं
एक दिन सूरज के बाजू में बैठे जगमगायेगे
नगीने जो आसमां में सितारे बन दमकते हैं
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मन का अवरोही विज्ञान
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आज विशेष है
अंक क्रमांंक चौदह सौ
इन पंक्तियों के लिखे जाते तक
कुल पृष्ठ दृश्य 493 268
कुल फॉलोव्हर 214
ब्लॉगसेतु रेंकिंग में नम्बर 01
ये आँकड़े हासिल हुए हैं...
आपके सहयोग और प्रेम की सदैव कामना
है।
हमारी टीम आप सभी पाठकों का
हृदयतल से आभारी है।
अपना बहुमूल्य साथ बनाये रखें।
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खेती जो हम जमीं से आसमां तक करते हैं
उपज में बहुमूल्य रत्न जग को रौशन करते हैं
एक दिन सूरज के बाजू में बैठे जगमगायेगे
नगीने जो आसमां में सितारे बन दमकते हैं
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मन का अवरोही विज्ञान
पर हाँ ... एक अंतर है
प्राण-वायु जैसे रिश्ते और प्राण-वायु में
ये रिश्ते होते हैं प्राण-वायु से इतर
रंगीन, स्वादिष्ट, सुगन्धित और दृश्य भी
हर पल.. हर क्षण ... हर घड़ी..
तनिक ... मन की आँखों, मन की जिव्हा
और सरसों की फली-सी नर्म-नाजुक
मन की उँगलियों से टटोलकर ज़रा ...
★★★★★
एक प्रेमगीत-सात रंग का छाता बनकर
एक प्रेमगीत-सात रंग का छाता बनकर
जब सारा
संसार हमारा
हाथ छोड़कर चल देता है,
तपते हुए
माथ पर तेरा
हाथ बहुत सम्बल देता है,
आँगन में
चाँदनी रात में,
चौरे पर दिया -बाती हो ।
★★★★★
एक खंजर सा उतरता
है किसी सीने में,
लम्हे - लम्हे में तड़पता
है कोई रातों को ।
यूँ तो तूफान ने
तोड़ा है बहुत कुछ मेरा,
मैंने छूने ना दिया
बस तेरी सौगातों को ।
★★★★★
नहीं चाहता वो मुझसे कुछ भी
केवल चाहता है संघनित करना
मेरी ख़्वाहिशों के बादल को
और भरना चाहता है
मेरा दामन खुशियोंं से
पर तुम्हें ये भी मंजूर नहीं
★★★★★
अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस पर विशेष
दादा- दादी,नाना- माना को,
★★★★★
नहीं भूलती वो माँ
इसी बीच माँ नाजाने क्यों मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अंदर अपने
कमरे में ले गई |उनका कमरा सुरुचिपूर्ण ढंग से सजा था|साफ- सुथरे बिस्तर के अलावा दवाई और पानी के साथ माँ की जरूरत
की हर चीज वहां मौजूद थी | इस कमरे में भी उनके दिवंगत
बेटे की एक और मुस्कुराती हुई तस्वीर मेज पर उनके
बिस्तर के बिलकुल सामने रखी थी |वह अचानक ना जाने
किस रौ में तस्वीर में अपने दिवंगत बेटे के चेहरे को सहलाती हुई।
★★★★★★
आज का यह अंक आपको कैसा लगा?
कृपया अपनी बहुमूल्य
प्रतिक्रिया अवश्य
प्रेषित करें।
हमक़दम के विषय के लिए
यहाँ देखिये
कृपया कल का अंक पढ़ना न भूले
कल आ रही हैं विभा दी
अपनी विशेष प्रस्तुति के साथ।
★★★
#श्वेता सिन्हा
अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस पर विशेष
दादा- दादी,नाना- माना को,
पहचानते तक नहीं बच्चे।
चाचा- बुआ,मामा-मौसी को,
जानते तक नहीं बच्चे।
वैसे तो सभी रिश्तेदार ,
अब सबको होते नहीं हैं।
जिनको ईश्वर ने है दिया ,
वे रिस्ते अब ढोते नहीं हैं।
★★★★★
नहीं भूलती वो माँ
इसी बीच माँ नाजाने क्यों मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अंदर अपने
कमरे में ले गई |उनका कमरा सुरुचिपूर्ण ढंग से सजा था|साफ- सुथरे बिस्तर के अलावा दवाई और पानी के साथ माँ की जरूरत
की हर चीज वहां मौजूद थी | इस कमरे में भी उनके दिवंगत
बेटे की एक और मुस्कुराती हुई तस्वीर मेज पर उनके
बिस्तर के बिलकुल सामने रखी थी |वह अचानक ना जाने
किस रौ में तस्वीर में अपने दिवंगत बेटे के चेहरे को सहलाती हुई।
★★★★★★
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अपनी विशेष प्रस्तुति के साथ।
★★★
#श्वेता सिन्हा






