नववर्ष की मेरी पहली प्रस्तुति पर
आप सभी सुधिजनों का
सादर अभिनन्दन
नवतिथि का स्वागत सहर्ष
नव आस ले आया है वर्ष
सबक लेकर विगत से फिर
पग की हर बाधा से लड़कर
जीवन में सुख संचार कर लो
हर क्षण से खुलकर प्यार कर लो
★
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
चलिए आज की रचनाएँ पढ़ते हैं
चलिए आज की रचनाएँ पढ़ते हैं
★
आदरणीय प्रकाश जी की लेखनी से
बाबुजी के डाँट में,
घर छोड़े के ख्याल में,
सोचला के बाद
घर जाए में
बड़ा निक लागेला।
माई के दुलार में,
नोक-झोंक कईला से,
रूठला के बाद
'आँचल के छाँव' जाए में
बड़ा निक लागेला हो
बड़ा निक लागेला हो
बड़ा निक लागेला...
सोचला के बाद
घर जाए में
बड़ा निक लागेला।
माई के दुलार में,
नोक-झोंक कईला से,
रूठला के बाद
'आँचल के छाँव' जाए में
बड़ा निक लागेला हो
बड़ा निक लागेला हो
बड़ा निक लागेला...
★★★★★
आदरणीय रवींद्र जी
वक़्त के गुलदान में
अंकुरित हुआ है
नन्हा-सा नया साल
आशाओं के साथ
नये ख़्वाबों का
पल्लवन होने दो।
आदरणीया दीपा जी
इसमें छुपा
रहस्य अपार है
ना होगी गर वेदना
ना होगा
सुख-दुख का
आभास।
विरह-मिलन
हैं जैसे दिन-रात।
★★★★★★
आदरणीय पुरुषोत्तम जी
उम्र की प्रवाह में, सूनी सी राह में,
ढ़लती सी हर सांझ में, ढूंढ लेना मुझे
एकाकीपन के, विपिन प्रांतर में,
अकेली राह में, संग चलता मिलूंगा,
फूल हूँ, रंग सा, खिलता मिलूंगा!
★★★★★
आदरणीय संजय जी
बेटी ने बहू बनकर
बी.ए वाली बात दोहरायी
सुनकर उसकी बातें उसकी सास गुर्राई
अगर आगे ही पढना था
तो पढ़ती 'अपने घर '
बहू है हमारी अब सेवा कर ,
★★★★★
आदरणीया पम्मी जी
सफ़्हो में ही कहीं न कहीं सिमटे रहेंगे
सफर के बाद भी यही कही बिखरे रहेंगे
सिफ़त ज़ीस्त का हो समझना
हमारी लफ़्ज़ों की हरारत इनमें ही निखरे रहेंगे
★★★★★★
और चलते-चलते पढ़िए
आदरणीया कामिनी जी की रचना
जीवन अनमोल"अवार्ड"
★★★★★★
और चलते-चलते पढ़िए
आदरणीया कामिनी जी की रचना
जीवन अनमोल"अवार्ड"
मुझे ऐसा लगा जैसे इस जीवन का सबसे बड़ा अवॉर्ड दे दिया हो मेरी बेटी ने मुझे। ईश्वर ने मुझे जो ये मनुज तन दिया है उससे मैंने कुछ तो ऐसा काम किया जो मेरी बेटी ने मुझे इतना बड़ा सम्मान दिया। सार्थक हो गया मेरा जीवन। मुझे वो सारी परेशानियां ,सारी कठिनाइयाँ ,लोगो की गालियाँ सब याद आने लगी लेकिन वे मुझे तकलीफ नहीं दे रही थी बल्कि एक सुखद एहसास करा रही थी। मैं ईश्वर को धन्यवाद देने लगी -हे प्रभु अगर आप ने मुझे उस वक़्त वो शक्ति ना दी होती तो शायद मैं उस वक़्त एक दृढ निश्चय के साथ एक कठोर फैसला नहीं ले पाई होती और आज मेरी शालू उस उपहार से वंचित रह जाती जो उसके जीवन की सबसे बड़ी ख़ुशी है।
★★★★★
आज की प्रस्तुति कैसी लगी?
आप सबों की बहुमूल्य प्रतिक्रिया
की प्रतीक्षा रहती है।
हमक़दम के विषय के लिए
★
कल का अंक पढ़ना न भूले,
कल की खास प्रस्तुति लेकर आ रही हैं
विभा दी
आज के लिए आज्ञा दें।
★
खुशी के क्षण आमोद हर्ष
हर त्योहार पर तर्क-वितर्क
तिथि,प्रश्न के जाल में उलझा
सकपकाया खड़ा है नया वर्ष
हर त्योहार पर तर्क-वितर्क
तिथि,प्रश्न के जाल में उलझा
सकपकाया खड़ा है नया वर्ष







