सादर अभिवादन
आज दो खबरें हैं
पहली ये कि दिव्या स्थायी रूप से दुबई में सिफ्ट हो गई है
उसने अपने आप को यहाँ से हटा लिया है, पर गूगल से नहीं हटी है
दूसरी ये कि मंगलवार को एक नई सूचना मिलेगी कि आपके एक
गीत-ग़ज़ल , हाईकु इत्यादि लिखना है विस्तृत विवरण मंगल को ही मिलेगी
सादर
अब रचनाएँ ....
जब से
कन्यादान में
शंख पानी ढार
बेटी को पराया
धन बताया जाने लगा
चेहरा कुछ मासूम बनाकर लोगों को भरमाते हैं
खलनायक मन में हँसता है पाँच सितारा होटल में
मिलजुल के सब ठगते रहते भोली-भाली जनता को
इसी खुशी में फिर जलसा है पाँच सितारा होटल में
तुम जा रहे हो , ना अब बात होगी।
किसी मोड़ पर,फिर मुलाकात होगी।
विरहा की अग्नि से व्याकुल न होना,
प्यार के सावन की बरसात होगी।
ये बारिशें बिल्कुल
सुख और दुख
दर्द और पीड़ा
पाना और खोना
मिलन और विरह
खिलना और मुरझाना
नमी और प्यास
मैं रचि रचि भोजना बनाई
और अपने पिया का खिलाई
मैं लौंगा इलायची मँगाई रामा
अरे रामा खाते पिया मोरे पान
कि होंठवा ललारी रे हारी ॥
न्याय के मंदिर में
आँखों पर पट्टी बांधे
मैं न्याय की देवी ..
प्रतीक्षा रत ...
कब दे पाऊँगी न्याय सबको...
हाथ में तराजू और तलवार लिये
तारीखों पर तारीख की
आवाजें सुनती रहती हूँ ..
वो चेहरे देख नहीं पाती ,पर
उनकी वेदना समझ पाती हूँ
आज बस
सादर





