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शनिवार, 25 जुलाई 2026

4814....भय केवल मन की छाया है

शुक्रवारीय अंक में 
आप सभी का हार्दिक अभिनंदन।
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​यह तुमुनाद नहीं,

यह चेतावनी की दुदुंभियॉं है।

यह उबलते हुए रक्त की घेराबंदी है

जो हर छलावा और ढोंग का

इन्द्रजाल तोड़ना चाहती है।

सावधान!

 असंतोष का यह भू-डोल

बदलाव का नया भू-गोल

गढ़ने को आतुर है...।

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पांच लिंकों का अगस्त माह से एक अभिनव कार्यक्रम
लघुकथा लिखिए ....
कम शब्दों में .. बड़ी बात कह डालने का अवसर ..
एक अलक (अति लघु कथा ) लिख डालिए झटपट--

शब्द विशेष है "कल्पना"
तो आइए अपनी कल्पना को साकार कीजिए
रचना भेजने की अंतिम तिथि 30 जुलाई 2026
हमें प्रेषित करें, माध्यम है ब्लॉग संपर्क फार्म द्वारा
2 अगस्त 2026 को प्रथम अंक
पाक्षिक प्रकाशन
रचनाओं का चयन आपके द्वारा
निश्चित रूप से  आप बेहतर लिखते है
आपके द्वारा लिखी रचनाएं प्रकाशित की जाएगी
साथ ही आदरणीय विभा दीदी के द्वारा त्रैमासिक प्रकाशित होने वाली
पत्रिका में स्थान पाने का भी अवसर मिलेगा।


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आज की रचनाऍं-


अस्तित्त्व में आया हुआ द्वीप हूँ मैं 
घृणा के गान से उपजी 
प्रचंड आँधियों के बीच जलता हुआ दीप हूँ मैं 
गीदड़ों के कोलाहल में 
गूँजता हुआ सिंहनाद हूँ मैं 



हो अपार गगन जहाँ सम्मुख 

मार्ग स्वयं ही खुलता जाता, 

भय बनकर तो मात्र ह्रदय का 

अंधकार ही जलता जाता ! 


हो भयभीत न पीछे मुड़ना 

सदा स्वर्ण को तपना पड़ता, 

हर इक लपट निखारे जाती 

 अंतर ओज ही साहस बनता !



हर तकरार में
यूँ तो तुमसे हार जाता हूँ,
और तुम हर बार
पूरे कमरे में
जीत की मुस्कान लिए फिरती हो।



नहीं जलती कोई लालटेन,

चुक जाते हैं दीपक के तेल-बाती,

जब नहीं भड़कता कहीं कोई शोला, 

जब नहीं सूझता हाथ को हाथ,

घनघोर अंधेरा हँसता है ठठाकर,

तब मैं उठाता हूँ बीड़ा,




सूखी धरती की प्यास लिए,
हरियाली का विश्वास लिए,
माटी की सौंधी साँस लिए,
जीवन का मधु-उल्लास लिए,
चलता अपना प्रकाश लिए

करुणा की अनुपम जागीर,
यह हिमगिरि का बहता नीर।


   इस अनुभव के मद्देनजर अब मानने लगी हूँ कि लेखक के जीवन का अभिन्न अंग सिर्फ लेखन ही नहीं, कुप्रचार झेलना भी है। साहित्य में अच्छा लिखना जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है उन बातों से अप्रभावित रहना जो आपकी अनुपस्थिति में कही जा रही हैं।


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आज के लिए इतना ही
मिलते है अगले अंक में।
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6 टिप्‍पणियां:

  1. ​यह तुमुनाद नहीं,
    यह चेतावनी की दुदुंभियॉं है।
    यह उबलते हुए रक्त की घेराबंदी है
    सुंदर अग्रालेख के साथ
    बेहतरीन अंंक
    वंदन

    जवाब देंहटाएं
  2. बदलाव का नया भू-गोल गढ़ना ही होगा
    साधुवाद

    जवाब देंहटाएं
  3. पांच लिंकों का अगस्त माह से एक अभिनव कार्यक्रम
    लघुकथा लिखिए ....
    कम शब्दों में .. बड़ी बात कह डालने का अवसर ..
    एक अलक (अति लघु कथा ) लिख डालिए झटपट--

    शब्द विशेष है "कल्पना"
    तो आइए अपनी कल्पना को साकार कीजिए
    रचना भेजने की अंतिम तिथि 30 जुलाई 2026
    हमें प्रेषित करें, माध्यम है ब्लॉग संपर्क फार्म द्वारा
    2 अगस्त 2026 को प्रथम अंक
    पाक्षिक प्रकाशन
    रचनाओं का चयन आपके द्वारा
    निश्चित रूप से  आप बेहतर लिखते है
    आपके द्वारा लिखी रचनाएं प्रकाशित की जाएगी
    साथ ही आदरणीय विभा दीदी के द्वारा त्रैमासिक प्रकाशित होने वाली
    पत्रिका में स्थान पाने का भी अवसर मिलेगा

    जवाब देंहटाएं
  4. प्रभावशाली भूमिका और सुंदर रचनाओं का संकलन, आभार श्वेता जी!

    जवाब देंहटाएं

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