शीर्षक पंक्ति: आदरणीय शांतनु सान्याल जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
पढ़िए ब्लॉगर डॉट कॉम पर प्रकाशित पाँच पसंदीदा रचनाएँ-
बारहखङी
वंदनवार सी,
चौवालीस
मनकों की
वर्णमाला
वनमाला सी,
राजभाषा
भारत की।
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विश्व हिंदी दिवस विशेष | जन-जन की अभिलाषा हिंदी | कविता रावत
जन-जन की अभिलाषा हिंदी, गौरव का गान है,
विश्व पटल पर चमक रहा, जो वो हिंदुस्तान है।
प्रौद्योगिकी के दौर में भी, इसका लोहा मान रहे,
विश्व हिंदी दिवस पर आज, सब इसे पहचान रहे।*****
पा जाते अगर, उड़ भी जाते,
ख्वाहिशों को, और, नजदीक लाते,
अनथक, कोशिशें मिन्नतें,
मगर, हसरतें, ख्वाहिशों के,
बेखबर होते हैं!
ख्वाहिशों के, तो, पर होते है!
*****
फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव
शानदार
जवाब देंहटाएंशुक्रिया आदरणीय रविन्द्र जी... मंच पर मुझे भी स्थान देने हेतु...
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा अंक है, सभी रचनाएँ पठनीय और बेहतरीन. सादर आभार रवींद्र जी
जवाब देंहटाएंभाव परक संकलन..रवीन्द्र जी, इस कङी में जोङने के लिए धन्यवाद। सभी रचनाकारों को अभिवादन । नमस्ते ।
जवाब देंहटाएंमेरी ब्लॉग पोस्ट सम्मिलित करने हेतु आपका बहुत बहुत आभार
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