शीर्षक पंक्ति: आदरणीया कविता रावत जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
हाज़िर हूँ रविवारीय अंक लेकर, पढ़िए पाँच रचनाएँ-
यह लड़की, सिर्फ़ 17 साल की थी जब इसे मौत की सज़ा सुनाई गई।
वो बोली- मैं चाहती हूं कि यह पता चले, और यह कि मैं याद किए जाने की हकदार बनी रहूं, यह भी सच है कि वह मौत से डरती थी, हां, लेकिन वह इतनी बहादुर थी कि उसने अपने देश के लोगों को धोखा देने के बजाय फांसी पर चढ़ना पसंद किया।
*****
मामला यह है कि अंजना निगम नामक एक संपन्न महिला की ज़हरभरी चॉकलेट खाने से मृत्यु हो जाती है। उन चॉकलेटों का पैकेट उसके पति मुकेश निगम को अपने एक साथी दुष्यंत परमार से प्राप्त हुआ था। दुष्यंत परमार को वह पैकेट डाक से मिला था जो कि प्रत्यक्षतः सोराबजी एंड संस नामक एक चॉकलेट निर्मात्री कम्पनी द्वारा उपहार स्वरूप भेजा गया था। अंजना ने अधिक चॉकलेट खाई थीं जबकि उसके पति मुकेश ने दो चॉकलेट खाई थीं एवं बीमार वह भी पड़ा था। प्रश्न यह है कि वे चॉकलेटें यदि सोराबजी एंड संस ने नहीं भेजी थीं तो किसने भेजी थीं एवं भेजने वाले का निशाना कौन था – अंजना निगम अथवा दुष्यंत परमार ? पुलिस इस मामले को नहीं सुलझा पाती एवं अंततः इसे क्राइम क्लब को सौंप देती है।*****सावित्री बाई फूले जयंती विशेष
जी ! .. सुप्रभातम् सह मन से नमन संग आभार आपका ...
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा संकलन. मेरे आलेख को स्थान देने हेतु आभार.
जवाब देंहटाएंअच्छा संकलन
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर संकलन,मेरी रचना को स्थान के लिए आपका बहुत बहुत आभार
जवाब देंहटाएंआभार,
जवाब देंहटाएं-दिग्विजय
सुंदर संकलन, बेहतरीन रचनाएँ
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति में मेरी ब्लॉग पोस्ट सम्मिलित करने हेतु आभार
जवाब देंहटाएं