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मंगलवार, 20 जनवरी 2026

4628... इतिहास लिखे जो कायरता

मंगलवारीय अंक में
आप सभी स्नेहिल अभिवादन 
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जीवन का सही अर्थ समझने के क्रम में-

“जीवन का अर्थ खोजने के लिए नहीं, बल्कि उसे जीने के लिए है।” 

“जीवन का उद्देश्य खुश रहना है।” 

“हर पल का अर्थपूर्ण तरीके से जीना ही जीवन का अर्थ है।”

“दूसरों की सेवा करना ही जीवन का सच्चा अर्थ है।” –

“अपनी पूरी क्षमता तक जीना ही जीवन का अर्थ है।”


आपकी दृष्टिकोण से जीवन की परिभाषा क्या है?


आज की रचनाऍं- 


जो मस्तक झुकते आए हैं,

अब उन्हें जरा तन जाने दो,

जो न्याय की बाँसुरी टूट गई,

उसे फिर से स्वर बन जाने दो।

 

बाज़ार सजा है झूठों का,

तुम अपना सच ले अड़ जाओ,

इतिहास लिखे जो कायरता,

उस पन्ने को फट जाने दो।

 


मैं जल हूँ

घर से नदी-नालों तक

करता कल-कल हूँ

उत्तर से दक्षिण तक

चलता पल-पल हूँ

मुझमें कचरा न फैलाओ 

मुझे बचाओ

घने बादल न चुराओ 

मुझे बचाओ




तनहाई की याद सताए तनहाई में जाना हो 
तो फिर जंगल और पहाड़ी वीरानों से मिल लेना 

आंखें पुरनम हो जायें घनघोर उदासी छा जाये 
छत पे चहकती चिड़ियों की तुम मुस्कानों से मिल लेना 

तेज हवा से लड़ने का जब तुमको हुनर कुछ आ जाये 
तब तुम सागर की लहरों के तूफानों से मिल लेना 



तुम फूलों के 
रंग ,खुशबुओं में 
कवियों के स्वप्नलोक में ,
लोककथाओं 
जनश्रुतियों में 
प्रेमग्रंथ में कठिन श्लोक में ,
जलतरंग पर 
खिले कमल सी 
भ्रमरों का अनुनाद है |



अब वह सोच रहा था कि इस पत्र का क्या करे? पहले मन किया कि वह पत्र को फाड़ कर डस्टबिन के हवाले कर दे. फिर विचार आया ... नहीं, यह भागना होगा. जवाब लिखना चाहिए, और शगुन को सब कुछ समझा देना चाहिए. पर कैसे? उसे खुद कुछ समझ नहीं आ रहा था. वह लिखे क्या? आखिर विचार आया अभी कुछ मत करो. वह उठा और उसने पत्र को सूटकेस में सबसे नीचे दबा कर रख दिया. जैसे किसी राज को दफ्न कर दिया हो. उसने महसूस किया उसका गला सूख रहा है. उसने अपनी बोतल उठाई और एक साँस में उसे मुहँ के जरीए अपने पेट में उड़ेल लिया



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आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में।
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