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मंगलवार, 13 जनवरी 2026

4621.... एक-दूसरे से अजनबी ही तो है...

मंगलवारीय अंक में
 आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।
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नये कलैंडर वर्ष का पहला त्योहार 
लोहड़ी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।

लोहड़ी पर्व पर नव विवाहित वधू और नवजात शिशुओं की पहली लोहिड़ी होने को विशेष महत्त्व के साथ मनाया जाता है। आज के दिन उत्सवपूर्ण वातावरण में गुड़तिल और मूँगफली रस्मी तौर पर लकड़ियों से जलाई गई आग में उसके आसपास गोल चक्कर में चलते हुएगीत गाते हुए समर्पित किए जाते हैं। पंजाब में लोहड़ी पर्व बहन-बेटियों के मान-सम्मान और रक्षा से जुड़ा हुआ विशिष्ट सामाजिक महत्त्व का त्योहार है। लोहड़ी पर्व के साथ अकबर के शासन काल में तत्कालीन परिस्थितियों में  दुल्ला भट्टी नामक सकारात्मक सोच के व्यक्ति का नाम जुड़ा हुआ है जो धनी लोगों का धन लूटकर ग़रीबों में बाँटता था और घोर ग़रीबी के चलते बाज़ार में बेची जाने वाली बेटियों को बचाकर उनकी शादियाँ करवाता था। पंजाब के लोकगीतों में दुल्ला भट्टी का यशगान मिलता है।

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।तस्वीर" ज़िंदगी की कभी एक सी नहीं रहती;

बहुत कुछ कहकर भी वो सबकुछ नहीं कहती,

थामकर वक़्त की लकीरें मुट्ठी में देखती तमाशा;

समुंदर समेटकर भी वो संग लहरों के नहीं बहती।




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आज की रचनाऍं- 


देखो राह की मिट्टी को 
वर्षा में घुल गयी 
महक बिखेरकर धुल गयी 
सर्द मौसम की सुहानी धूप 
पर्वतों पर प्रकृति सँवारती है अपना रूप 
नियति-क्रम में हरेक पल 
एक-दूसरे से अजनबी ही तो है...


पर हर बार
मेरे एहसास
रास्ते में ही ठहर गए
क्योंकि तुम्हारा Inbox
पहले से भरा हुआ था
नामों से,
वादों से,
और शायद
उन ख़्वाबों से
जिनमें मेरा ज़िक्र नहीं था।



उनके शब्द हवा में लटक गए. प्रिया अब सिकुड़ी हुई, अपने आप में समाई खड़ी थी. शगुन के मन में कल पढ़ा हुआ एक और शब्द उभरा” "वस्तुकरण". प्रिया का शरीर, उसकी पोशाक, एक समस्या बन गई थी. एक ऐसी वस्तु जिसका विश्लेषण, आलोचना और सार्वजनिक सुधार किया जा सकता था, ताकि वह देखने वालों को 'उचित संदेश’ दे. शगुन ने अपनी स्कर्ट को नीचे खींच लिया, यह एक स्वचालित, आत्म-सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया थी. डर का यह वायरस छूत की तरह फैल गया था.


‌ गम और दर्द बेमानी लगता हैं
जब दूसरे बंदों की शहादत देखता हूँ


सैकड़ो चिराग खुदही शर्म से बुझ जाते हैं
कुछ  अंधेरो की हिमायत देखता हूँ



विवेकानंद के मनोवैज्ञानिक ढांचे के केंद्र में आत्म-शक्ति की अवधारणा है—प्रत्येक मनुष्य के भीतर निहित अनंत शक्ति. उन्होंने मानवता की प्राथमिक मनोवैज्ञानिक बीमारी "कमजोरी" को माना. उनके विचार में, अधिकांश मानसिक पीड़ा और नैतिक विफलताएं एक खंडित आत्म-छवि से पैदा होती हैं जहाँ व्यक्ति खुद को "भेड़" के रूप में देखता है, न कि "शेर" के रूप में.


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आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में।
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