हिंदी की ऊष्मा और ऊर्जा का एक स्रोत चला गया।
-------* आकाश हम छू रहे हैं, ज़मीन खो रहे हैं।
* आप किसी के प्रभाव में कुछ दिन तक तो रह सकते हैं, लेकिन आजीवन नहीं रह सकते।
* सच्चाई की कानाफूसी नहीं होती।
* हमें मार्ग पर चलना भी है, मार्ग बनाना भी है।
* लेखक का मार्ग अपनी सुदीर्घ परंपरा और विचार से निर्धारित होगा, वह राजनैतिक दलों की करवटों से नहीं बनेगा।
* लेखक का जीवन का गृहस्थ के जीवन से टूट-टूटकर चलता है।
* पुरस्कार के पीछे समाज होना चाहिए।
उपरोक्त अमूल्य विचारों को गढ़ने वाले कथाकार ज्ञानरंजन साहित्यिक आसमान का चमकीला सितारा बन स्मृतियों में शेष रह गये।
यह सच है कि ज्ञानरंजन इन दिनों बहुत सक्रिय नहीं थे, कहानियां लिखना वे कबकी छोड़ चुके थे, 'पहल' को भी बंद कर चुके थे और सार्वजनिक व्याख्यानों, साक्षात्कारों और मुलाकातों में व्यस्त थे, लेकिन उनके जाने से जो शोक हिंदी संसार में पसर सा गया, उससे पता चलता है कि हिंदी की दुनिया उन्हें कितनी श्रद्धा और कितने सम्मान के साथ देखती थी।
खुलते ही द्वार होता संभावना का जन्म
हवा-पानी,गंध,धूप और धूल का पदार्पण
ठोक-पीट सिखाता जीवन का शिष्टाचार
अनुभव और अनुभूति के सहज नेगाचार
और छिलकों पे भुट्टों के परोसती
हम जैसे सैलानी अपने ग्राहकों को
नर्म-गर्म सिंके-उबले भुट्टे के संग
नमक-नींबू-मिर्ची की चटक जुगलबंदी।
अपने दोनों हाथों में लिए तुम भुट्टे
एक में सिंके और दूसरे में उबले हुए।
सिंका हुआ स्वयं खाती-चबाती-गुनगुनाती
और उबला हुआ मुझे खिलाती-पुचकारती,
अपने-अपने स्वाद के अनुसार और वहीं
गुड़ वाली गर्मागर्म कड़क चाय से भरे
भाप उगलते हों दो अदद कुल्हड़।






जी ! .. सुप्रभातम् एवं मन से नमन संग हार्दिक आभार आपका .. हमारी बतकही को मंच प्रदान करने के लिए ...
जवाब देंहटाएंआज की आपकी भूमिका में ज्ञानरंजन जी को आपका याद करना द्रवित कर गया।
गत तीन माह में लगातार .. भारतीय साहित्यकारों में से विनोद कुमार शुक्ल और ज्ञानरंजन जी के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय साहित्यकारों में लेखिका सोफी किन्सेला व नाटककार टॉम स्टॉपर जी के अलावा गत वर्ष भर में कई नामचीन व हुनरमंद भारतीय कलाकार - धर्मेंद्र, मनोज कुमार, असरानी, पंकज धीर, सतीश शाह, शेफाली जरीवाला, सुलक्षणा पंडित और संध्या शांताराम तथा अंतरराष्ट्रीय मंच से जीन हैकमैन, वैल किल्मर और बॉब यूकर जैसी प्रतिभाओं ने साहित्य जगत और सिनेमा जगत, जिनमें कहते हैं कि चोली-दामन का रिश्ता है, दोनों के गलियारों में एक अपूरणीय शून्यता पसार दी है .. शायद ...
इसी फेहरिस्त में "पांच लिंकों का आनन्द" जैसे साहित्यिक मंच की पुरोधा - यशोदा जी भी हैं, उन्हें मन से सादर नमन 🙏
बेहतरीन अंक
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर अंक। आभार।
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