शुक्रवारीय अंक में
आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।
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कैलेंडर की तारीख बदल गयी,
२०२५ को विदा कर
वक़्त २०२६ का स्वागत कर बेहद उत्साहित है।
बीतता हर लम्हा कैसे इतिहास बन जाता है
इसके साक्षात गवाह हम और आप है।
बेहद अजीब से एहसास है
ऑंख नम , गीले जज़्बात है।
मेरी यादों के खज़ाने में
आप बेशकीमती सौगात हैं।
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गुज़रता एक भी पल वापस न आयेगा।
ख़ास पल स्मृति में रह-रह के मुस्कायेगा।
आनेवाले पल के पिटारे में क्या राज़ छुपा है
यह आने वाला पल ही बतलायेगा।
जीवन की चुनौतियों और खुशियों का बाहें फैलाकर
स्वागत करिये फिर तारीख़ चाहे कोई भी हो, साल चाहे कोई भी रहे कोई फ़र्क नहीं पड़ता।
समय के दंश को भूलने का प्रयास करते हुए
सकारात्मकता की ओर बढ़ते हुए-
आज की रचनाऍं-
स्वागत! जीवन के नवल वर्ष
आओ, नूतन-निर्माण लिये,
इस महा जागरण के युग में
जाग्रत जीवन अभिमान लिये;
दीनों दुखियों का त्राण लिये
मानवता का कल्याण लिये,
स्वागत! नवयुग के नवल वर्ष!
तुम आओ स्वर्ण-विहान लिये।
हर बीता पल समय का स्पंदन
लहर-लहर बहता नदी का जल
घूम-फिर कर फिर लौटेगा कल
क्षितिज तक नाव अपनी ले चल
सुस्वागत 2026,
इतना सा वादा कर लेना—
कि इंसानियत ज़िंदा रहे,
सच की आवाज़ कमज़ोर न पड़े,
और मेहनत करने वाले हाथ
कभी खाली न लौटें।
2026, आपका अभिनंदन......
कल्पनाओं का, उफन रहा, इक सागर,
लहरों की धुन पर, झूमता ये गागर,
हर आहट, हर कंपन, अनगिनत से ये स्पंदन,
आह्लाद लिए प्रतीक्षित क्षण,
नववर्ष, तेरा कोटि-कोटि अभिनंदन!
स्वागत आगत का करें , अभिनंदन कर जोर ।
सबको दे शुभकामना , आये स्वर्णिम भोर ।
घर आँगन खुशियाँ भरे, विपदा भागे दूर,
सुख समृद्धि घर में बसे, खुशहाली चहुँओर ।।
तिलिस्म
आपने अब तक कुछ बताया नहीं कि मेरे यहाँ होने से क्या मुमकिन है मेरी तलाश..??
क्या पढ़ा आपने मेरे मस्तिष्क से हृदय तक जातीं रेखाएँ??
क्या मेरी उपमाओं में देखा आपने स्वयं का किरदार?
क्या इन ख़तों से उग आए आपके आँगन में सितारों वाले गुल??
क्या आपकी हथेलियों पर महकता मिला ओध?
क्या ख़ुमारी की झालर मिली आपकी चौखट पर?
क्या सुरों ने खींची इन्द्रधनुष की कोई कृति ??
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आज के लिए इतना ही
मिलते हैं अगले अंक में।
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सुन्दर
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