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बुधवार, 28 जनवरी 2026

4636..किसकी है जनवरी..

प्रातःवंदन 

 "किसकी है जनवरी,

किसका अगस्त है?

कौन यहाँ सुखी है, कौन यहाँ मस्त है?

सेठ है, शोषक है, नामी गला-काटू है

गालियाँ भी सुनता है, भारी थूक-चाटू है

चोर है, डाकू है, झुठा-मक्कार है

कातिल है, छलिया है, लुच्चा-लबार है

जैसे भी टिकट मिला

जहाँ भी टिकट मिला

शासन के घोड़े पर वह भी सवार है

उसी की जनवरी छब्बीस

उसी का पन्द्रह अगस्त है

बाक़ी सब दुखी है, बाक़ी सब पस्त है….."

नागार्जुन 

सामाजिक सार लिए कथन के साथ  ,

बुधवारिय प्रस्तुतिकरण में शामिल रचनात्मक रूप कुछ इस प्रकार है✍️ 

मनुष्य

अगर मुझे मनुष्य होना सीखना हो

तो मैं तुम्हारे मौन से शुरू करूँगा

जहाँ करुणा

किसी दिखावे की मोहताज नहीं होती।

अगर मुझे कोई प्रश्न सताने लगे

तो उत्तर मैं किताबों में नहीं

तुम्हारी आँखों के ठहराव में खोजूँगा

जहाँ गहराइयों में जवाब तैरते हैं..

✨️

ख़ाली किनारे

✍️ अनीता सैनी

……..

यहाँ इस

समाज नाम की

चारदीवारी में

किसी न किसी को

कुछ न कुछ बचाने का ज़िम्मा

चुपचाप सौंप दिया जाता है।

✨️

एक त्योहार....



(१)

सत्तहत्तर वर्षों से

ठिठुरता गणतंत्र

पदचापों की

गरमाहट से

जागकर

कोहरे में लिपटा

राजपथ

पर कुनमुनाता है।..

✨️

स्पर्शबिंदु" - "The Tangent"

मैं जानता हूँ—

तुम मुझे समग्र रूप से

स्पर्शित नहीं कर सकती

क्योंकि

तुम एक सरल रेखा हो

और मैं—वृत्त।..

✨️

।।इति शम।।

धन्यवाद 

पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति प्रिय पम्मी जी।
    स्थान देने हेतु हार्दिक धन्यवाद 💐
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. सुंदर भूमिका के साथ पठनीय रचनाओं से सजा आज का अंक बहुत अच्छा लगा दी।
    आभारी हूं दी।
    सस्नेह।

    जवाब देंहटाएं

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