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रविवार, 18 जनवरी 2026

4626...भ्रम टूटने पर टूटता है ख़्वाब...

 शीर्षक पंक्ति: आदरणीया डॉ. (सुश्री) शरद सिंह जी की रचना से.

सादर अभिवादन.

रविवारीय अंक में पढ़िए पसंदीदा रचनाएँ -

विता | भ्रम | डॉ (सुश्री) शरद सिंह


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शिव स्तुति-3

तू ही संत असंत महंत है, तू क्षितिज है छोर दिगंत है,

तू अनादि-आदि न अंत है, तू असीम अपार, अनंत है,

तू अघोर घोर जयंत है, तू ही सर्व लोक चरा-चरम्,

तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम्.

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व्यक्तिगत कुंठा जब दंभ का चोला पहन, शब्दों का रूप अख्तियार करती है, तो अनर्थ ही होता है

खुद के गुमान में डूबे ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि जब आपका व्यवहार, बर्ताव, कथनी करनी का फर्क, ढोंग या उदण्डता लोगों को बार-बार दिखाई देती है, तो वे आपको नकार देते हैं ! आपका समाज को खंडित, विखंडित करने या देश को तनावग्रस्त या कमजोर करने का प्रयास जनता कतई बर्दास्त नहीं करती ! झूठे किस्से, कहानियों, आरोपों को वह समझने-पहचानने लगी है ! समय बदल रहा है, जितनी जल्दी हो समझ व संभल जाएं नहीं तो अप्रासंगिक होते देर नहीं लगेगी ! हाल ही के बहुतेरे उदाहरण सामने हैं ! बड़े-बड़े तीसमारखाँ निपटा दिए जनता ने ! क्योंकि अब देश के अवाम को राष्ट्रबोध, स्वयंबोध, शत्रुबोध, इतिहासबोध अच्छी तरह होने लगा है ! अब वह बहकावे में नहीं आती !

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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल (बनारस यात्रा भाग -1)

इस बार ग़ज़ल कुंभ का आयोजन धर्म और अध्यात्म की प्राचीन नगरी काशी (बनारस-वाराणसी)में 10/11जनवरी,2026 को हुआ।इस बार इस कार्यक्रम में हम सभी साथियों ने ग़ज़ल पाठ तो किया ही साथ ही अपने परिजनों के संग पावन नगरी काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन तथा बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थ सारनाथ जैसे ऐतिहासिक महत्व के स्थलों के भ्रमण का आनंद भी लिया।

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फिर मिलेंगे.

रवीन्द्र सिंह यादव



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