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रविवार, 11 जनवरी 2026

4619...अंध घाटियों में जाग रहा है हिंस्र संसार...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय शांतनु सान्याल जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

पढ़िए ब्लॉगर डॉट कॉम पर प्रकाशित पाँच पसंदीदा रचनाएँ-

हरफ़नमौला हिन्दी

बारहखङी वंदनवार सी,

चौवालीस मनकों की

वर्णमाला वनमाला सी,

राजभाषा भारत की।

*****

विश्व हिंदी दिवस विशेष | जन-जन की अभिलाषा हिंदी | कविता रावत

जन-जन की अभिलाषा हिंदी, गौरव का गान है,
विश्व पटल पर चमक रहा, जो वो हिंदुस्तान है।
प्रौद्योगिकी के दौर में भी, इसका लोहा मान रहे,
विश्व हिंदी दिवस पर आज, सब इसे पहचान रहे।
*****

रात्रि ढलान--

अनंत निस्तब्धता है
अरण्य नदी के
आसपास,
सुदूर
पहाड़ों के उस पार निस्तेज सूर्य डूब चला
अंध घाटियों में जाग रहा है हिंस्र
संसार,

*****

ख्वाहिशों के पर

पा जाते अगर, उड़ भी जाते,

ख्वाहिशों को, और, नजदीक लाते,

अनथक, कोशिशें मिन्नतें,

मगर, हसरतें, ख्वाहिशों के, बेखबर होते हैं!

ख्वाहिशों के, तो, पर होते है!

*****

चिनगारी

शगुन ने सैकण्डरी स्कूल परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी. गणित और विज्ञान के अंकों ने उसे यहाँ तक पहुँचाया था. अब उसे अध्ययन के लिए अपनी स्ट्रीम चुननी थी. वह जीव विज्ञान लेना चाहती थी. सोचती, यदि डॉक्टर बन सकी तो परिवार और लोगों के काम आ सकती हूँ. खुद का और परिवार का नाम भी रोशन होगा.

*****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

5 टिप्‍पणियां:

  1. शुक्रिया आदरणीय रविन्द्र जी... मंच पर मुझे भी स्थान देने हेतु...

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत अच्छा अंक है, सभी रचनाएँ पठनीय और बेहतरीन. सादर आभार रवींद्र जी

    जवाब देंहटाएं
  3. भाव परक संकलन..रवीन्द्र जी, इस कङी में जोङने के लिए धन्यवाद। सभी रचनाकारों को अभिवादन । नमस्ते ।

    जवाब देंहटाएं
  4. मेरी ब्लॉग पोस्ट सम्मिलित करने हेतु आपका बहुत बहुत आभार

    जवाब देंहटाएं

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