निवेदन।


फ़ॉलोअर

मंगलवार, 10 मई 2022

3389....स्वयं का आकलन

मंगलवारीय अंक में
आपसभी का स्नेहिल अभिवादन।
--------
इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े 
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े, 
जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी-पी के गर्म अश्क 
यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े।

मशहूर शायर 

की आज पुण्यतिथि है।
उनकी रूहानी आवाज़ महसूस कीजिए।


मैं ढूँढता हूँ जिसे
------
आइये आज की रचनाओं का आनंद लें।
आज के अंक में
हर  रचना के साथ कैफ़ी साहब की आवाज़ में
नज़्म और गज़ल के छोटे-छोटे वीडियो हैं।
रचनाओं और वीडियो का कोई तारतम्य नहीं मात्र एक प्रयोग भर है आप सभी साहित्य प्रेमी पाठकों के लिए ।
उम्मीद है आपको पसंद आयेगी।
-----



आज की रात
--–
मैं समन्दर 
सब कुछ मेरे अंदर ।
मन मेरा 
एक कुशल 
गोताखोर की तरह 
लगाता रहता है 
मुझमें ही गोता 
ढूँढने को 
कुछ सीपियाँ 
कि मिल जाएँ 
कुछ नायब मोती 
हाथ आती भी हैं 
कुछ सीपियाँ 
लेकिन फिसल जाती हैं 
और फिर मन 
लगा लेता है गोता ।



एक बोसा
तुम्ही सरला नित दौड़ पड़ती, छुने उस चन्द्र कला को चली।
न हाथ कभी लगता कुछ तुम्हें, तपी विरहा फिर पीड़ा जली।
प्रवास सदा मम अंतस रहो, बसो तनुजा हिय मेरे पली।
न दुर्लभ की मन चाह रखना, मयंक छुपे शशिकांता ढली ।।



एक लम्हा
-----
जैसे खत्म हो जाती है
किसी बच्चे की कच्ची पेंसिल
जैसे खत्म हो जाती है
रसोई की बची अंतिम रोटी 
भूख से ठीक पहले





आख़िरी रात
--------
एक आकाशगंगा में 
विचरते हुए हम 
बातें ही तो करते हैं 
अपने एंड्राइड फ़ोन में
परअंतरक्षीय तरंगें उतारकर
मिटा लेते हैं
हज़ारों प्रकाशवर्ष की दूरी
जो कोई ग़ुनाह नहीं 
इसीलिए 
चाहती हूं तुम्हारी यात्रा 
हर दफ़ा सड़क की लंबाई को 
ज़रा और बढ़ाती जाए 



पशेमानी
--–-
उसकी इसी आदत के चलते चप्पल की दुकान दिखते ही मेरी हृदय की गति बढ़ जाती है. कोशिश करता हूँ कि उसे किसी और बात में फांसे दुकान से आगे निकल जायें और उसे वो दिखाई न दे. लेकिन चप्पल की दुकान तो चप्पल की दुकान न हुई, हलवाई की दुकान हो गई कि तलते पकवान अपने आप आपको मंत्रमुग्ध सा खींच लेते हैं. कितना भी बात में लगाये रहो मगर चप्पल की दुकान मिस नहीं होती।

------

आज के लिए बस इतना ही
कल का अंक लेकर आ रही हैं-
 प्रिय पम्मी दी
-----+

8 टिप्‍पणियां:

  1. जय श्री राधे...
    जैसे खत्म हो जाती है
    किसी बच्चे की कच्ची पेंसिल
    जैसे खत्म हो जाती है
    रसोई की बची अंतिम रोटी
    भूख से ठीक पहले
    सुंदर अंक..
    आभार नायाब गीतों के लिए..

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह वाह वाह!
    बहुत सुंदर पठनीय और समा बांधता अंक ।
    बहुत शुभाकामनाएं श्वेता जी ।

    जवाब देंहटाएं
  3. आज की प्रस्तुति गज़ब समाँ बाँध रही है । कैफ़ी आज़मी की बेहतरीन नज़्में सुनवाई ।पशेमानी मेरा पसंदीदा गीत है । लाजवाब प्रस्तुति ।
    किसी के लिए प्रेम छोटा शब्द होता है तो किसी के लिए जानलेवा , समुद्र भी अपनी लहरों को समझाता है कि इस चक्कर में न पड़ो । कुछ बातों के खत्म होने से परेशान तो कुछ मौन से । सबसे रोचक प्रस्तुति मैचिंग चप्पल के साथ लेखक की व्यथा की बयानबाज़ी है । बाकी सुधि पाठक आकलन करें ।

    जवाब देंहटाएं
  4. प्रिय श्वेता आज की प्रस्तुति की जितनी प्रशंसा करूँ कम ही होगी।
    कैफ़ी आज़मी साहब की जादूई आवाज़
    में उनकी बेहतरीन रचनाएं, साथ ही शानदार लिंक्स सभी रचनाएं बहुत आकर्षक सुंदर।
    सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई।
    करीब एक महीने की अनुपस्थिति या निष्क्रियता, किसी भी ब्लॉग पर जाना नहीं हुआ न हीं पोस्ट डाली और अभी जब सक्रिय हुई और दूसरी ही पोस्ट को पाँच लिंकों पर देखा कर मन प्रसन्नता से खिल उठा ।
    हृदय तल से आभार मेरी रचना को पांच लिंकों पर स्थान देने के लिए।
    सस्नेह।

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...