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रविवार, 25 जुलाई 2021

3100 ...न मुझे तुझ सी कोई और मिलेगी न तुझे मुझसा कोई और

सादर अभिवादन
लीजिए जुलाई भी निकल गई
इसबार शान्त रहा 2021 की ये महीना
इसे तूफान के पहले की शान्ति नही कह सकते
देखती हूँ इस सप्ताह क्या पढ़वा पाती हूँ..

गीले
गोबर के
बास से,
उन
औरतों की
उकेरी गयी,
किसी कुशल
शिल्पी की
'मॉडर्न आर्ट'-सी,
पाँचों ही
उँगलियों की
गहरी छाप-से ...


हदें तोड़तीं
बरसाती नदियाँ
युवा पीढ़ियाँ ।

साझा कुटुंब
घटाती बढ़ाती माँ
रिश्तों में नून ।

खाली मंडप -
पिता के नयनो में
पहला आँसू।


राधिका एक बार  रग्घू का मुँह देखती और दोबारा अपना गंदला सा बगीचा, उसने सोचा भी नहीं था कि जिस रग्घू को वो पंद्रह साल से ऐसे ही लताड़ रही थी,वो ऐसा भी निर्णय ले सकता है । रग्घू रामधुन गाता हुआ तेज कदमों से अपने घर की तरफ़ भाग रहा है,


पहले भ्रम हुए
अब जुक्ति के उद्भ्रम हो तुम
मेरी मुक्ति के गुरुक्रम हो तुम .


मजिस्ट्रेट शालिनी उपाध्याय बारीकी से उनके हाव भाव निरख परख रही थीं ! 
उन्होंने दोनों से इस उम्र में तलाक के लिए आवेदन करने का कारण पूछा
..
पत्नी – “और आपका ख़याल कौन रखता है ? सारी सारी रात पीठ की सिकाई कौन करता है ? घुटनों में तेल की मालिश कौन करता है ? मेरा किया तो कुछ नज़र ही नहीं आता ना आपको !” पत्नी का रोना और तीव्र हो गया था !

पति –“अच्छा अच्छा ठीक है ! चलो घर चलें ! जैसे इतनी गुज़र गयी लड़ते झगड़ते बाकी भी गुज़र ही जायेगी ! न मुझे तुझ सी कोई और मिलेगी न तुझे मुझसा कोई और!”  मजिस्ट्रेट की ओर देखे बिना दोनों एक दूसरे की बाहों का सहारा लिये कमरे से बाहर आ गये थे !
........
कल दीदी आएगी
सादर



12 टिप्‍पणियां:

  1. जी ! ☺ .. आलसभरी रविवारीय सुबह की सुप्रभातम् वाले नमन संग आभार आपका .. आज की अपनी बहुआयामी प्रस्तुति में इस "पाँच लिंकों का आनन्द" के मंच पर मेरी गोबर-सी बतकही के कंडे थापने के लिए .. बस यूँ ही ...
    आज के शीर्षक "न मुझे तुझ सी कोई और मिलेगी न तुझे मुझसा कोई और" को चरितार्थ करता हुआ, क़ुदरत की कृपा हो कि, हमारा रिश्ता आपके (इस मंच के) साथ यूँ ही ताउम्र बनी रहे .. बस यूँ ही ...
    पर ये जुलाई मूई शान्त कहाँ है भला .. जाते-जाते "बोलबम-बोलबम" के जयकारे की शोर के साथ-साथ कई जलीय प्राकृतिक आपदाओं के प्रकोप की शोर से स्वयं को कलंकित कर गयी .. जाते-जाते .. शायद ...
    (अगर हर महीने ही, संसद और सीमा की बारूदी शोर को minus कर दें तो ..)

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. मास श्रावण की पहली तारीख..पर इसपर चढ़ाई करती दूसरी भी है
      "बोलबम-बोलबम"..
      ये भारत है देवताओं का निवासस्थान..
      वे जिसे चाहते हैं अपने पास बुला लेते हैं
      सादर

      हटाएं
  2. बहुत ही बेहतरीन और सरहानीय प्रस्तुति!
    सभी को बहुत बहुत बधाई!
    वैश्या पर आधारित हमारा नया अलेख एक बार जरूर देखें🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

    जवाब देंहटाएं
  3. आज की शानदार और विविधतापूर्ण रचनाओं की प्रस्तुति के लिए आपको बहुत शुभकामनाएं आदरणीय दीदी,मेरी लघुकथा को शामिल करने के लिए आपका हार्दिक आभार, सादर नमन।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  5. आज के संकलन के सभी सूत्र बेमिसाल ! मेरी लघुकथा को इसमें सम्मिलित किया आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार यशोदा जी ! सप्रेम वन्दे !

    जवाब देंहटाएं
  6. रोचक एवं आकर्षक सूत्रों का संकलन प्रस्तुत किया है । अति सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।

    जवाब देंहटाएं
  7. आज प्रस्तुति के लिंक्स पर अभी जाना हुआ । आज का हर लिंक बेहद सुंदर । सुनाती जी के ब्लॉग पर प्रथम बार जाना हुआ। सुंदर हाइकु रचनाएँ हैं ।अमृता जी की कविता बहुत पसंद आई । जिज्ञासा की और साधना जी की लघु कथा सक्षम है अपनी बात कहने में ।और यूँ तो सुबोध जी की कविता के भाव बेहतरीन हैं , बाकी गोबर कंडे वो जाने।
    रोचक सूत्र ।

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत ही बेहतरीन लिंक संयोजन ।कंडे से लेकर बुजुर्ग दम्पति की प्रेम कहानी तक सबने अपनी छाप छोड़ी है ।मेरी रचना को यहां मंच साझा करने मे अवसर देंव हेतु हार्दिक आभार 🙏 देरी से आने की भी माफी 🙏

    जवाब देंहटाएं

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