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शनिवार, 11 जुलाई 2020

1821... महेश्वर

chaturmas 2020 dates : this time 5 months on the space of 4 month

सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
चातुर्मास 4 महीने की अवधि है, जो आषाढ़ शुक्ल एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है। उक्त 4 माह को व्रतों का माह इसलिए कहा गया है कि उक्त 4 माह में जहाँ हमारी पाचनशक्ति कमजोर पड़ती है वहीं भोजन और जल में बैक्टीरियों की तादाद भी बढ़ जाती है। उक्त 4 माह में से प्रथम माह तो सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा नहीं कि सिर्फ सोमवार को ही उपवास किया और बाकी वार खूब खाया। उपवास में भी ऐसे नहीं कि साबूदाने की खिचड़ी खा ली और खूब मजे से दिन बिता लिया।
चौमासी चौदस 2019: जानें चतुर्मास का ...
वन्दे महेश्वर
दंभी बनकर धमकाते हैं
अनुचित कार्य किये जाते हैं
दोषहीन दंडित होते हैं
आहत  होते मर जाते हैं.
तांडव नृत्य न कर अंबर पर
थाम लो कर हे नाथ दिगंबर
Chaturmas2016, Starts From 16 July - चातुर्मास में ...
महेश्वर
जिंदगी नहीं रुकती
देने को किसी की
तुच्छ उधेड़बुन का जवाब
किसी की हताश चीत्कारों पर
मुड़कर नहीं देखती है जिंदगी
जानिए चातुर्मास क्या है? क्यों ...
चौमासा
जिसने सबका मन भरमाया
 स्वाति युगल बाहर को आए
देख नजारा वो हर्षाए
 मौसम का है अजब नजारा
चातुर्मास, समय है प्रकृति से जुड़कर ...
सावन
मैंने इस परम्परा को जीवित रख रखा है इसलिए
हर साल बेटे लक्ष्य के लिए दो दिन के लिए ही सही पर
झूला जरूर डालता हु ओर उसे झूले देता हूं ओर आपके साथ
शेयर करता हु ताकि आने वाली पीढ़ी को पता चले कि ये भी
एक जमाना था और झूले का भी अपना अलग ही महत्व था
Chaturmas 2020: ये है 5 मास तक चलने वाले ...
चौमासा
नृत्य किया बागों  में
कंठ से मधुर  स्वर निकाले
आकर्षक नयनाभिराम नृत्य प्रदर्शन में |
 आकृष्ट किया अपनी प्रिया को
 रंगबिरंगे फैले पंखों से
 नयनों से  की अश्रु वर्षा भी

><><><
पुन: मिलेंगे...
><><><
हम-क़दम का अगला विषय है-
'अभिशाप'
इस विषय पर आप अपनी
किसी भी विधा की रचना
आज शनिवार शाम तक हमें भेज सकते हैं।
चयनित रचनाएँ हम-क़दम के 126 वें अंक में
आगामी सोमवार को प्रकाशित की जाएँगीं।


13 टिप्‍पणियां:

  1. प्रकृति का मिज़ाज़ भी ऋतु अनुरूप बदलता है।
    हर ऋतु का खान-पान रहन-सहन सब भिन्न है। सभी ऋतुओं का अपना महत्व है चौमासा की विशिष्टता है
    वर्षा ऋतु से निखरी प्रकृति हरियाली और उत्पन्न बैक्टेरिया मनुष्यों से बचाव के लिए मनुष्य में संयम की प्रवृति में वृद्धि।
    सुंदर रचनाओं का सराहनीय संकलन दी।
    महेश्वर जी की रचना पढ़वाने के लिए बहुत आभार आपका।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  2. मनभावन
    सावनांक..
    आभार...
    सादर नमन...

    जवाब देंहटाएं
  3. आपका ब्लॉग मुझे बहुत अच्छा लगा,आपकी रचना बहुत अच्छी हैं।

    जवाब देंहटाएं
  4. सादर नमन
    सदाबहार प्रस्तुति
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  5. चातुर्मास और प्राकृतिके अभिनव क्रियाकलाप , भोलेनाथ की आराधना का चतुर्मास तो ईश्वर के विश्राम का चतुर्मास !!!सुंदर रचनाएँ और ज्ञानवर्धक भूमिका आदरणीय दीदी 👌👌👌 चातुर्मास कभी हुलसाता है ,कभी रुलाता है। इसमें सब है तीज -त्यौहार , कोकिल की कूक, मयूर का नृत्य और फल - फूलों की बहार, हरियाली का समंदर और झमाझम बारिश 👌👌आदिदेव महेश्वर की आराधना- अभ्यर्थना के साथ कवि महेश्वर जी रचनाएँ बढिया हैं सभी रचनाकारों को शुभकामनायें और बधाई। आपको आभार और प्रणाम🙏🙏🌹🌹🙏🙏

    जवाब देंहटाएं
  6. मेरे भाव---

    🙏🙏
    जग असत्य ,अनित्य और नश्वर ,
    तू परमसत्य ,अनादि ,योगेश्वर ;
    ललाट सोहे अर्धचन्द्र नवल ;
    रूप अभिनव ,सर गंगधार धवल ,
    त्रिलोकीनाथ , शिवा , करुणाकर,
    कोटि नमन तुम्हें! भोले शंकर
    🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

    जवाब देंहटाएं
  7. जय बम भोले सभी रचनाएं सराहनीय है

    जवाब देंहटाएं
  8. वाह बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  9. प्रकृति का मिज़ाज़ भी ऋतु अनुरूप बदलता है।
    हर ऋतु का खान-पान रहन-सहन सब भिन्न है। सभी ऋतुओं का अपना महत्व है चौमासा की विशिष्टता है
    वर्षा ऋतु से निखरी प्रकृति हरियाली और उत्पन्न बैक्टेरिया मनुष्यों से बचाव के लिए मनुष्य में संयम की प्रवृति में वृद्धि।
    सुंदर रचनाओं का सराहनीय संकलन दी।
    महेश्वर जी की रचना पढ़वाने के लिए बहुत आभार आपका।
    सादर।

    जवाब दें

    जवाब देंहटाएं

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