निवेदन।


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शनिवार, 21 सितंबर 2019

1527...पत्र...

सबको यथायोग्य
प्रणामाशीष

15 सितम्बर 2019 को अनुजा मीना भारद्वाज जी से भेंट हुई संग में वीणा वत्सल जी से हम मिलने गए थे... मीना जी से हमारी पहली भेंट थी... लेकिन लगा नहीं... संग में उनकी बहू भी थी जो बेहद प्यारी बिटिया है... अपार हर्ष वाला दिन गुजरा.. सकूँ वाले पल गुजरे थे मधुर रिश्ता देखकर.. उन्हें लिखने वाली हूँ

पत्र
 दरअसल जहां श्रद्धा का भाव होता है, वहां दिल से दिल की दूरी बढ़ जाती है। छोटे-बड़े का अहसास एक तरह का दुराव पैदा करता है । मैं चाहता हूं कि दिल की भाव भूमि पर हम परस्पर स्नेह भाव से रहें। जहां दोनों पक्ष समान हो, न कोई जरा सा अधिक, न कोई जरा सा भी कम। हां, जब बहुत ही जरूरी हो तो नई पीढ़ी इस स्नेह में सम्मान का भाव मिला दे और बदले में मैं उनके प्रति स्नेह भाव में दुलार का समावेश कर दूं।


राष्ट्रीय समाचार पत्र में इस बार के बारे में अनेक समाचार प्रकाशित हुए हैं | इस बात को 
लेकर हरियाणा सरकार की आलोचना की गई है कि सरकार की ओर से आवश्यक कदम नहीं 
उठाए जा रहे हैं | अतः आप इस दिशा में तत्काल आवश्यक कार्यवाही करें | बाढ़ से प्रभावित 
क्षेत्रों में तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई जाए समाज के पिछड़े और गरीब लोगों से योग की 
आवश्यकता वस्तुएं मुफ्त बंटी जाएं जिनके मकान इस बार में गिर गया उनका तत्काल अनुदान 
की धनराशि भी दी जाए |


ईमेल,व्यवसायिक हो या सामाजिक,अनौपोचैयक शैली में लिखे जाते है
अपने ईमेल में हमेशा विषय लिखे जो पुर संदेश को एक वाक्य में दर्शाता है
व्यवसायिक ईमेल लिखने की अलग प्रथए है,पर आपको अगर पढ़नेवाले का नाम पता है तो उसके पहले नाम का ही प्रयोग किया जाता है
Dear लिखना आवश्यक नही है,हलाकी कुछ लोग इसे लिखना पसंद करते है
सामान्य रूप से,व्यवसायिक ईमेल संक्षिप्त में होने चाहिए


1. सरकारी पत्र पूरी तरह से औपचारिक होते हैं इनमें व्यक्तिगत परिचय अथवा पहचान की झलक नहीं होती है।
2. यह संक्षिप्त और संतुलित होते हैं नपे-तुले शब्दों का प्रयोग इनमें होता है।
3. इनमें राजभाषा की शब्दावली रखी जाती है, इनमें प्रयोग की गई भाषा संयत और शिष्ट होती है।
4. सरकारी पत्र हमेशा अन्य पुरुष (थर्ड पर्सन) में लिखे जाते हैं, मैं अथवा हम जैसे सर्वनामों का प्रयोग इनमें नहीं किया जाता।
5. सरकारी पत्र में एक निर्देश अथवा सूचना एक ही पैराग्राफ में लिखा जाता है यदि दूसरी या तीसरी बात लिखनी हो तो 2 या 3 संख्या डालकर नए पैराग्राफ से लिखा जाता है।


निवेदन है कि इस समय बोर्ड की परीक्षाएं प्रारंभ हो चुकी हैं | बच्चे अपनी परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए हैं किन्तु शादी या अन्य समारोहों में ध्वनि विस्तारक यंत्रो के प्रयोग से परीक्षा की तैयारी में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है | रात में लोग न सो पा रहे हैं न ही बच्चे पढ़ पा रहे हैं |
अतः आपसे अनुरोध है कि आप अपनी प्रशासकीय शक्तियों का उपयोग करते हुए परीक्षा अवधि तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर प्रतिबधं लगाने का आदेश जारी करने का कष्ट करें | धन्यवाद!
><
फिर मिलेंगे

अब बारी है विषय की
नवासिवाँ विषय
सजदा
उदाहरण
सजदे तो कम करो..... मुदिता गर्ग
विषय इसी अंक से लिया गया है

आज अंतिम तिथि-21 सितम्बर
दोपहर तीन बजे तक
प्रेषण माध्यम ब्लॉग सम्पर्क फार्म
प्रतीक्षा रहेगी

22 टिप्‍पणियां:

  1. जी प्रणाम
    हमेशा की तरह एक विशेष तरह की प्रस्तुति है..

    बड़े - छोटे के मध्य परस्पर समानता को बढ़ाने के लिये स्नेह और उसमें , सम्मान एवं दुलार का भाव यह शिष्टाचार को बनाये भी रखता है..
    यह पढ़ कर अच्छा लगा।

    परंतु आधुनिक सभ्यता में बच्चे अपने अभिभावक को " आप" की जगह "तुम "कहे और इसी तरह पत्नी अपने से अवस्था में बढ़े पति को भी " तुम" कहे तो इस स्नेह को हम कितना सम्मान अथवा दुलार भारतीय संस्कृति एवं संस्कार के अनरूप कहें , एक प्रश्न मेरा भी है..।
    दी यदि कभी समय हो ,तो इस पर भी एक पत्र किसी प्रस्तुति में लिखें ...।
    हमसभी का मार्गदर्शन होगा.. प्रणाम।


    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत ही बढ़िया
    सदा की तरह..
    सादर नमन...

    जवाब देंहटाएं
  3. अच्छे लोगों से भेंट दिन बना ही देती है.
    छोटों के साथ मित्रवत व्यवहार रखने की बात आज स्वीकार्य है.
    पत्र लेखन एक कला है वाकई आज जाना.

    जवाब देंहटाएं
  4. आपके स्नेह से हम दोनों अभिभूत हैं दीदी..आपसे मिलना और स्नेहाशीष लेना सौभाग्य है हमारा 🙏🙏
    पत्र लेखन की उत्तम जानकारी ।

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह !बहुत सुन्दर प्रस्तुति दी जी
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  6. बेहतरीन विषय ,इस आभासी दुनिया के स्नेहिल मित्रो से मिलना एक सुखद एहसास हैं ,सादर नमस्कार आप सब को

    जवाब देंहटाएं
  7. भूमिका में दो विदूषियों के संगम का साक्षी छवि चित्र से सजा अंक बहुत प्यारा है | ब्लॉग जगत के दो चहरे जो किसी परिचय के मोहताज नहीं का मिलन बहुत विशेष है | प्रिय मीनाजी और विभा दीदी आप दोनों को हार्दिक बधाई | यूँ मीना जी के स्नेहिल व्यवहार से वाकिफ हूँ | एक प्रबुद्ध कवयित्री और सुघड़ चर्चाकार के रूप में वे अपनी अलग पहचान रखती हैं | फिर भी मीना जी के बारें में आपके लेख की प्रतीक्षा रहेगी | ऐसा आतिथ्य सचमुच सौभाग्य है |

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत बढ़िया संकलन आदरणीय दीदी आपके अपने अंदाज में जिसपर विषय भी बहुत प्यारा | पत्र एक भावनाओं से भरा दस्तावेज जिसकी जगह कोई नहीं ले सकता | सभी सराहनीय सूत्र जिसमें मंगलम जी का लेख अत्यंत चिंतनपरक है | उनके ये उदगार बहुत उल्लेखनीय हैं ---------------------

    जहां दोनों पक्ष समान हो, न कोई जरा सा अधिक, न कोई जरा सा भी कम। हां, जब बहुत ही जरूरी हो तो नई पीढ़ी इस स्नेह में सम्मान का भाव मिला दे और बदले में मैं उनके प्रति स्नेह भाव में दुलार का समावेश कर दूं। बाकी समय एक-दूसरे के प्रति हमारा मित्रवत व्यवहार बना रहे। ... और फिर समय से पहले किसी को जबर्दस्ती उम्रदराज घोषित कर देना भी कोई अच्छी बात थोड़े ही है! -------------------------

    जिनपर हमें जरुर विचार करना जरूरी है कि कहीं हम भी अनजाने में इसी व्यवहार के गुलाम तो नहीं ? क्योंकि अति सर्वत्र वर्जयते !!!! भले शिष्टाचार ही क्यों ना हो !

    पत्र आत्मीयता के शीतल उच्छ्वास हुआ करते थे जिनमें लिखने वाला भले ज्यादा शिक्षित ना हो पर अपनी भावनाओं को बिना लागलपेट के लिखता था | दशकों तक निजी पत्रों ने डाकिये के महत्व को खूब बढ़ाया जिसपर फिल्मों और साहित्य में खूब लिखा गया |

    साहित्य में पत्र लेखन को एक अहम् विधा के रूप में स्थान मिला | विशेष लोगों के पत्र हमेशा के लिए साहित्य की धरोहर बन गये जिनमें मिर्जा ग़ालिब , महात्मा गाँधी | पंडित नेहरु जी , इत्यादि के साथ स्वामी विवेकानन्द के पत्र भारत की सांस्कृतिक धरोहर हैं |

    मैंने अपने स्कूली जीवन में अपने आसपास की बुआ बहनों भाभियों के लिए खूब पत्र लिखे जिनके लिए मेरी दिवंगत दादी जी ने खूब मार्गदर्शन किया | किस को पूजनीय , किसको आदरनीय तो किसे प्रिय लिखा जाये उनके सानिध्य में ज्ञान पाया | मैंने मेरे ब्लॉग मीमांसा पर पत्र पर मेरे लेख में पत्र पर मेरी एक रचना जिसे यहाँ लिखना चाहूंगी --

    फिर आज तुम्हारी पाती से -

    कई बिछुड़े पल याद आये ;

    जो जाके के लौट ना पाएंगे -

    वो परसों और कल याद आये |


    भूल चली थी जो गीत कई -

    सहसा फिर से याद आये ,

    मुस्काए अधर भले बरबस -

    पर मेघ सजल नैंनों पर छाए

    जो पल - पल,मन महकाते हैं -

    खुशियों के कोलाहल याद आये !!



    स्नेहिल स्पर्श वो माँ का

    पल पल मन को छू जाता है ,

    हूँ दूर भले पर दूर नहीं -

    ये चुपके से कह जाता है;

    जो स्नेहाश्रु छलकाते थे -

    वो नैना निर्मल याद आये !!


    कागज के सीने से लिपटा -

    ये स्नेह तुम्हारा अनुपम है -

    इस ममता का ना मोल कोई-

    जग सारा बाकि निर्मम है ;

    इस प्यार को याद करूँ तो बस -

    माँ का आँचल याद आये !!!!!!

    तकनीक के इस युग में यदि आज किसी के नाम कोई भावनाओं से भरा पत्र आता है तो उससे भाग्यशाली कोई नहीं | इस अविस्मरनीय प्रस्तुती के लिए अकोती आभार दीदी |

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जितनी उम्दा आपकी रचना है उतनी ही खूबसूरत आपकी भावाभिव्यक्ति है

      हटाएं
    2. बहुत सुंदर एवं सार्थक भावाव्यक्ति दी। आपकी प्रतिक्रियायें रचनाकारों एवं मंचों की शोभा में चार चाँद लगा देती है।
      सादर प्रणाम दी।🙏

      हटाएं
    3. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

      हटाएं
    4. आदरणीय दीदी, सादर प्रणाम। 🙏🙏🙏🌷💐🌷💐

      हटाएं
    5. प्रिय श्वेता ,हार्दिक आभार और मेरा प्यार । ☺🌷💐🌷💐

      हटाएं
  9. विभा दी एवं मीना दी को सादर प्रणाम। आभासीय जगत के परिचय से आत्मीय संबध तक मिलन की खुशबू से जीवन की यात्रा महकती रहे।

    विभा दी की प्रस्तुतियाँ सदैव विशिष्ट होती है।
    हमेशा की भाँति अनगिनत तथ्य समेंटे एक ही.विषय पर अपूर्व संकलन।

    जवाब देंहटाएं
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