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शुक्रवार, 13 सितंबर 2019

1519..हमारे ही मज़हब की लड़की थमा दी......चलो, वापस कर आएँ.....!”


सादर अभिवादन
सारा जग व्यस्त है
आने-जाने में
बिना किसी लाग-लपेट के
सीधे चलें रचनाओँ की ओर..
आज कविराज भगवत रावत का
जन्मदिन है आइए पढ़ते हैं उनकी रचना


आदरणीय भगवत रावत
घरों की तरफ़ लौटते हुए लोग
भले लगते हैं ।

दिन भर की उड़ान के बाद
घोंसलों की तरफ़ लौटतीं चिड़ियाँ
सुहानी लगती हैं ।
.....
आज की रचनाएँ..

कई वर्ष पूर्व एक रहस्मयी घटना घटित होती है, कई दिनों का 
भूखा-प्यासा लगभग २९ वर्षीय साधु एक ट्रैन में चढ़ जाता है, 
टी-टी ट्रैन में पहुंचकर यह पाता है कि साधु बेटिकेट 
फर्स्ट क्लास बोगी में यात्रा कर रहा है। टी टी का पारा चढ़ता है, 
वह ट्रैन रुकवाता है और साधु को अपशब्द कह बोगी से 
बाहर निकाल देता है। वह साधु मदमस्त होकर, नंगे पाँव 
पैदल ही ट्रैन की दिशा में चलने लगता है। लेकिन जैसे ही 
ट्रैन को चलने का संकेत मिलता है, ट्रैन के पहिए 
घूमते ही नहीं है, कई तकनीशियन और इंजीनियर 
निरीक्षण के उपरान्त कोई दोष नहीं पाते हैं। टीटी को 
पूर्व में घटित घटना का स्मरण हो उठता है, वह 
भागकर साधु को क्षमा-याचना कर वापस लेकर 
सादर ट्रैन में बिठाते हैं, ट्रैन चल पड़ती है। बाबाजी की 
सशर्त ट्रैन में बैठने की वजह थी, गाँव नीब करौरी का 
रेलवे हाल्ट, जहाँ आज भी ट्रैने रूकती है, 


मेघों से आच्छादित आकाश में 
जब अनायास खिलता है इंद्रधनुष
जल की बूंदों से छन कर आती
सूर्य रश्मि के प्रखर तेज को ही
कहते हैं इच्छाशक्ति ।


मातृभाषा हम सबकी हिंदी
ममता और दुलार है हिंदी

हिंदोस्ताँ की शान है यह
अब रहती मुरझाई-सी हिंदी

सौतन बनकर इंग्लिश रानी
सबके दिलों में छाई है इंग्लिश


घाटे का सौदा
दो दोस्तों ने मिलकर दस-बीस लड़कियों में से एक चुनी और बयालीस रुपये देकर उसे ख़रीद लिया. रात गुज़ारकर एक दोस्त ने उस लड़की से पूछा : “तुम्हारा नाम क्या है? ” 
लड़की ने अपना नाम बताया तो वह भिन्ना गया : “हमसे तो कहा गया था कि तुम दूसरे मज़हब की हो....!” 


टूट रहे सारे रिश्ते 
कल के धीरे- धीरे 

जुड़ रहे सारे रिश्ते 
आज के धीरे - धीरे , 
....

छपना छपाना 
कहीं भीड़ कहीं 
खालिस सा वीराना
‘उलूक’ ठीक नहीं 
थोड़ा सा समझने 
के लिये इतने 
सारे साल लगाना 

अंतिम रचना बगैर सूचित किए
आज बस..
यशोदा


8 टिप्‍पणियां:

  1. मम्मी- पापा बोलते बच्चे
    कांवेन्ट स्कूल में पढ़ते हैं
    हम हिन्दीभाषी लोगों की
    ग़ज़ब ये कहानी है ....
    घिर गई काले अंग्रेज से हिंदी
    दुबकी, तस्वीरों में छुप बैठी है
    जिसे देख दूर से
    हम जय बोला करते हैं...
    प्रणाम दी ..।

    आपकी प्रस्तुति में विविध विषयों का संगम रहता है।

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर लिंक्स यशोदा दी।

    जवाब देंहटाएं
  3. सस्नेहाशीष संग असीम शुभकामनाएँ छोटी बहना
    अति सुंदर प्रस्तुतीकरण

    जवाब देंहटाएं
  4. सुंदर प्रस्तुति।मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार यशोदा जी।

    जवाब देंहटाएं
  5. इस अंक में स्थान देने के लिए बहुत आभार यशोदा जी ।
    समय तो सच में नहीं किसी के पास । सोचने के लिए भी नहीं । पढ़ने के लिए क्या होंगे । फिर भी पांच लिंक पढ़े जाते हैं । पंच रत्नों की तरह सहेजे जो जाते हैं ।

    जवाब देंहटाएं

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