सादर अभिवादन
सारा जग व्यस्त है
आने-जाने में
बिना किसी लाग-लपेट के
सीधे चलें रचनाओँ की ओर..
आज कविराज भगवत रावत का
जन्मदिन है आइए पढ़ते हैं उनकी रचना
जन्मदिन है आइए पढ़ते हैं उनकी रचना
आदरणीय भगवत रावत
घरों की तरफ़ लौटते हुए लोग
भले लगते हैं ।
दिन भर की उड़ान के बाद
घोंसलों की तरफ़ लौटतीं चिड़ियाँ
सुहानी लगती हैं ।
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आज की रचनाएँ..
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आज की रचनाएँ..
कई वर्ष पूर्व एक रहस्मयी घटना घटित होती है, कई दिनों का
भूखा-प्यासा लगभग २९ वर्षीय साधु एक ट्रैन में चढ़ जाता है,
टी-टी ट्रैन में पहुंचकर यह पाता है कि साधु बेटिकेट
फर्स्ट क्लास बोगी में यात्रा कर रहा है। टी टी का पारा चढ़ता है,
वह ट्रैन रुकवाता है और साधु को अपशब्द कह बोगी से
बाहर निकाल देता है। वह साधु मदमस्त होकर, नंगे पाँव
पैदल ही ट्रैन की दिशा में चलने लगता है। लेकिन जैसे ही
ट्रैन को चलने का संकेत मिलता है, ट्रैन के पहिए
घूमते ही नहीं है, कई तकनीशियन और इंजीनियर
निरीक्षण के उपरान्त कोई दोष नहीं पाते हैं। टीटी को
पूर्व में घटित घटना का स्मरण हो उठता है, वह
भागकर साधु को क्षमा-याचना कर वापस लेकर
सादर ट्रैन में बिठाते हैं, ट्रैन चल पड़ती है। बाबाजी की
सशर्त ट्रैन में बैठने की वजह थी, गाँव नीब करौरी का
रेलवे हाल्ट, जहाँ आज भी ट्रैने रूकती है,

मेघों से आच्छादित आकाश में
जब अनायास खिलता है इंद्रधनुष
जल की बूंदों से छन कर आती
सूर्य रश्मि के प्रखर तेज को ही
कहते हैं इच्छाशक्ति ।

मातृभाषा हम सबकी हिंदी
ममता और दुलार है हिंदी
हिंदोस्ताँ की शान है यह
अब रहती मुरझाई-सी हिंदी
सौतन बनकर इंग्लिश रानी
सबके दिलों में छाई है इंग्लिश
घाटे का सौदा

दो दोस्तों ने मिलकर दस-बीस लड़कियों में से एक चुनी और बयालीस रुपये देकर उसे ख़रीद लिया. रात गुज़ारकर एक दोस्त ने उस लड़की से पूछा : “तुम्हारा नाम क्या है? ”
लड़की ने अपना नाम बताया तो वह भिन्ना गया : “हमसे तो कहा गया था कि तुम दूसरे मज़हब की हो....!”
टूट रहे सारे रिश्ते
कल के धीरे- धीरे
जुड़ रहे सारे रिश्ते
आज के धीरे - धीरे ,
....

छपना छपाना
कहीं भीड़ कहीं
खालिस सा वीराना
‘उलूक’ ठीक नहीं
थोड़ा सा समझने
के लिये इतने
सारे साल लगाना
अंतिम रचना बगैर सूचित किए
आज बस..
यशोदा
यशोदा


