बर्तन माझती कुम्हारिन....ज़फ़र
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किसी की आँख हैं पीली किसीकी आँखे गुलाबी हैं,
बर्तन माझती कुम्हारिन के हुस्न पर ग़रीबी हावी हैं..!!!
प्रेम की दीपक तुमने हज़ारो किताबो में जला रखे,
मुफलिशी और भूख को मैंने कलाम अपनी चढ़ादी हैं,
चाँद सा....पंकज प्रियम
क्यूँ देखे तू चँदा, खुद चेहरा तेरा चाँद सा
क्यूँ देखूँ मैं चँदा, जब प्यारा मेरा चाँद सा।
चाहत होगा चकोर का,क्या होगा भोर का
क्यूँ इंतजार करना,ये मुखड़ा तेरा चाँद सा
करवाचौथ....अनुराधा चौहान
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माथे पर कुमकुम सजे
करें सोलह श्रृंगार
सुहागिनें मनाएं मिलकर
करवाचौथ का त्यौहार
मेहंदी लगे हाथों में
रंग-बिरंगी चूड़ियां
आलता लगे पैरों में
छनकती हैं पायलिया
तेरी याद आई....साधना वैद
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बंद घर के दरवाज़े,
बंद दिल के दरवाज़े
घंटी बजा जब भी अन्दर आई
पग ठिठके, मन उमड़ा,
हूक सी उठी दिल में और
जाने क्यों अम्मा तेरी
बहुत याद आई !
आओ न प्रेम को अमर कर दो....अभिलाषा (अभि)
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तुम्हारे लिए कोई कसम न हो
फिर भी पूरा जनम है
सात फेरे न सही
हम तेरे तो हैं,
सुहाग का चूड़ा, बिछुआ, महावर
आरती का थाल
सब कुछ सजाया है
शुभकामनाएँ उलूक को
अट्ठारह लाख पृष्ठ दर्शन लांघने हेतु
डॉ. सुशील कुमार जोशी
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किसी को लग रहा है
कबड्डी चल रही है
जी नहीं
ये एक जगह की
बात नहीं है जनाब
देश में
हर गली मोहल्ले में
ध्यान से देखिये जनाब
कान खोलिये नाक खोलिये
आँख खोलिये जनाब
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आज्ञा दें
यशोदा
सुप्रभात दी:)
जवाब देंहटाएंआपकी परेशानी समझ सकते हैं..पर फिर भी आपके द्वारा किया प्रयास सराहनीय है।
सारी रचनाएँ बहुत अच्छी है आज के अंक की।
सुंदर प्रस्तुति है दी।
सादर।
सुप्रभात,
जवाब देंहटाएंनमस्कार,बहुत लाज़वाब रचनाये हैं,
काफी विभिन्नताएं लिए हैं आज की प्रस्तुति।
उलूक को बधाई सुभकामनाये
,जफ़र को भी स्थान देने के लिए धन्यवाद
Wow
जवाब देंहटाएंचिट्ठों की चिट्ठाकारों की
जवाब देंहटाएंपाठकों की टिप्पणीकारों की
जय के साथ
सब से ज्यादा जयजयकार
चिट्ठों के समचार देने वाले
सुबह के और शाम के अखबारों की
आभारी है 'उलूक टाइम्स' पाँच लिंकों की हलचल. चर्चा मंच और ब्लॉग बुलेटिन जैसे बड़े प्लेटफॉर्म के चिट्ठा चर्चाकारों का भी इस मील के पत्थर तक पहुँचाने के लिये।
पुन: आभार।
शुभ दोपहर
जवाब देंहटाएंसुंदर प्रस्तुति के साथ बहुत अच्छी रचनाओं का चयन।
आपकी श्रमसाध्य को नमन
धन्यवाद।
सुन्दर लिंक्स
जवाब देंहटाएंसुंदर प्रस्तुति बेहतरीन रचनाएं सभी चयनित रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई मेरी रचना को स्थान देने के लिए बहुत बहुत आभार यशोदा जी
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंसदैव की भाँति बेहतरीन... मुझे स्थान देने के लिए बहुत आभार🙏🙏🙏🙏
जवाब देंहटाएंआपकी हृदय से आभारी हूँ यशोदा जी ! पिछली २७ तारीख से प्रवास में थी आज ही गृह वापिसी हुई है ! मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !
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