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रविवार, 21 अक्तूबर 2018

1192....कहाँ माँगे थे चाँद और सितारे कभी

सादर अभिवादन..
रविवार शुभ हो...
और क्यों न हो....
साफ-सफाई के लिए साथी मिला
वो भी पहचाना-़जाना...
होते रहेगी साफ-सफाई...
चलिए कुछ पढ़ लिया जाए......


सपने.....डॉ.वर्षा सिंह
बहुत लुभाते बेघर को घर के सपने 
घर में लेकिन आते बाहर के सपने 

प्यूरीफायर देख तैरते आंखों में 
पोखर, पनघट वाले, गागर के सपने 



शब्द नाचते से आते थे
इक माला में गुँथ जाते थे
रंगों गंधों से सज धज कर
चारों और महक जाते थे
क्या हुआ कि सरगम टूट गई ।।


कल  सुबह अचानक फोन आया ..अंकल!  महिला अस्पताल में पापा ने आपको बुलाया है... दीदी को पापा- मम्मी लेकर गये है...।
    पता चला कि उनकी बिटिया को प्रसव पीड़ा शुरू है। बड़ी पुत्री की पहली डिलेवरी रही , अतः माता- पिता ने सोचा कि गांव के ससुराल से बेहतर सुविधा वे यहाँ मायके में उपलब्ध करवा सकते हैं। पर सरकारी अस्पताल का हाल जगजाहिर है ही, परम स्वतंत्र हैं  यहाँ के मसीहा..।
       यदि बेहतर उपचार चाहिए तो पैसा या फिर जुगाड़ होना ही चाहिए, अन्यथा फिर...?  खैर , नगर विधायक प्रतिनिधि 
चंद्रांशु गोयल ने सहयोग किया। हमारे पत्रकार साथी सुमित गर्ग 
भी आ गये। हमें पत्रकार जान डाक्टर और नर्स ने अच्छे व्यवहार 
का प्रदर्शन किया और भाई साहब नाना बन गये। यह  शुभ समाचार उन्होंने सबसे पहले मुझे ही फोन पर दी।


खेल है यह जिंदगी के 
टूटना मुझको नहीं है 
बंद हों जब द्वार सारे  
हौसला भी कुछ वहीं है 


कहाँ माँगे थे चाँद और सितारे कभी  
तुम यूँ ही हमसे नज़रें चुराते रहे !

न रही जब ज़ुबानी दुआ और सलाम
बेवजह ख्वाब में आते जाते रहे !

आज बस
आज्ञा दें
यशोदा



19 टिप्‍पणियां:

  1. खेल है यह जिंदगी के
    टूटना मुझको नहीं है
    बंद हों जब द्वार सारे
    हौसला भी कुछ वहीं है ...

    सुंदर अंक, सभी रचनाकारों का आभार।
    इस पथिक के विचारों को स्थान देने के लिये यशोदा जी आपका पुनः हृदय से आभार।

    जवाब देंहटाएं
  2. सस्नेहाशीष छोटी बहना
    सुंदर संकलन
    सफाई बढ़ियाँ से हो जाएगा

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर संकलन सभी चयनित रचनाकारों को बधाई

    जवाब देंहटाएं
  4. सुन्दर रविवारीय हलचल प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  5. मेरी ग़ज़ल को चयनित करने के लिए मैं आपके प्रति अत्यंत आभारी हूं 🙏

    जवाब देंहटाएं
  6. Excuse me, सम्भवतः Link में कुछ तकनीकी दिक्कत है, यहां पर दी गई लिंक से मेरा page खुल नहीं रहा है।

    जवाब देंहटाएं
  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. कृपया मेरी पोस्ट को इस link पर पढ़ने का कष्ट करें....

      http://ghazalyatra.blogspot.com/2018/10/blog-post_10.html?m=0

      हटाएं
    2. आदरणीया वर्षा जी,
      त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थी है अब लिंक सही हो चुका है। सादर आभार ध्यान.आकृष्ट करवाने के लिए।
      सादर।

      हटाएं
  8. प्रिय श्वेता सिन्हा जी,
    बहुत- बहुत आभार, मेरी पोस्ट को शामिल करने और Link सुधारने के लिए।
    आप सभी मित्रों का सहयोग सदैव मेरा उत्साहवर्धन करता है।
    पुनः आभार सहित,
    शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर प्रस्तुति शानदार रचनाएं सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई

    जवाब देंहटाएं
  10. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत सुंदर प्रस्तुति शानदार रचनाएं सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई

    जवाब देंहटाएं
  12. सुन्दर प्रस्तुति प्रिय बहन यशोदा आभार हमें शामिल किया है लम्बे समय बाद बीमारी से उठी पुनः सक्रीय होती हूँ

    जवाब देंहटाएं
  13. सार्थक प्रस्तुति यशोदा जी ! मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार ! सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं !

    जवाब देंहटाएं
  14. बेहतरीन प्रस्तुतिकरण उम्दा लिंक संकलन...

    जवाब देंहटाएं
  15. बहुत सुंदर लिंकों का संकलनश, भाव विभोर करते काव्य बहुत सुंदर प्रस्तुति, सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं

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