सादर अभिवादन..
रविवार शुभ हो...
और क्यों न हो....
साफ-सफाई के लिए साथी मिला
वो भी पहचाना-़जाना...
होते रहेगी साफ-सफाई...
चलिए कुछ पढ़ लिया जाए......
सपने.....डॉ.वर्षा सिंह
रविवार शुभ हो...
और क्यों न हो....
साफ-सफाई के लिए साथी मिला
वो भी पहचाना-़जाना...
होते रहेगी साफ-सफाई...
चलिए कुछ पढ़ लिया जाए......
सपने.....डॉ.वर्षा सिंह

बहुत लुभाते बेघर को घर के सपने
घर में लेकिन आते बाहर के सपने
प्यूरीफायर देख तैरते आंखों में
पोखर, पनघट वाले, गागर के सपने
शब्द नाचते से आते थे
इक माला में गुँथ जाते थे
रंगों गंधों से सज धज कर
चारों और महक जाते थे
क्या हुआ कि सरगम टूट गई ।।

कल सुबह अचानक फोन आया ..अंकल! महिला अस्पताल में पापा ने आपको बुलाया है... दीदी को पापा- मम्मी लेकर गये है...।
पता चला कि उनकी बिटिया को प्रसव पीड़ा शुरू है। बड़ी पुत्री की पहली डिलेवरी रही , अतः माता- पिता ने सोचा कि गांव के ससुराल से बेहतर सुविधा वे यहाँ मायके में उपलब्ध करवा सकते हैं। पर सरकारी अस्पताल का हाल जगजाहिर है ही, परम स्वतंत्र हैं यहाँ के मसीहा..।
यदि बेहतर उपचार चाहिए तो पैसा या फिर जुगाड़ होना ही चाहिए, अन्यथा फिर...? खैर , नगर विधायक प्रतिनिधि
चंद्रांशु गोयल ने सहयोग किया। हमारे पत्रकार साथी सुमित गर्ग
भी आ गये। हमें पत्रकार जान डाक्टर और नर्स ने अच्छे व्यवहार
का प्रदर्शन किया और भाई साहब नाना बन गये। यह शुभ समाचार उन्होंने सबसे पहले मुझे ही फोन पर दी।

खेल है यह जिंदगी के
टूटना मुझको नहीं है
बंद हों जब द्वार सारे
हौसला भी कुछ वहीं है

कहाँ माँगे थे चाँद और सितारे कभी
तुम यूँ ही हमसे नज़रें चुराते रहे !
न रही जब ज़ुबानी दुआ और सलाम
बेवजह ख्वाब में आते जाते रहे !
आज बस
आज्ञा दें
यशोदा
आज्ञा दें
यशोदा
