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रविवार, 3 जून 2018

1052.....अच्छी भली आँखों के अंधों का कोई करे तो क्या करे

सादर अभिवादन
पूरे इतिहास में वर्ष के
हर दिन हर घण्टे में
कुछ न कुछ घटित होता है
और होते रहेगा...

पर गूगल जी महाराज के पास
आज का कोई रिकॉर्ड नहीं है...
यानि ..आज का दिन पाक साफ है

आज यदि आप कोई हंगामा करते हैं तो

आज का दिन  आपके नाम में दर्ज हो जाएगा....
.....शुरु करते हैं हंगामा.....


My photo
सब हिसाब मांगते हैं। 
और एक दिन ऐसा आता है,
जब जीवन हमसे हिसाब मांगता है । 
तुम्हें तो मैंने जीवन उपहार दिया था । 
तुमने उसे हिसाब-क़िताब कैसे समझ लिया ?
संसार ने तुम्हें बहुत कुछ दिया । 




पहाड़ों के ठाट भी बड़े निराले हैं
मरकत और सब्ज रंगों से सजे
अपनी ही धुन में मगन ।
कुदरत ने भी दोनों हाथों सेे
नेह की गागर इन पर
बड़े मन से छलकी है ।


My photo
आँखें जो खुली तो उन्हें अपने क़रीब पाया ना था
कभी थे रूह में शामिल आज उनका साया ना था

बेपनाह मोहब्बत की जिनसे  उम्मीदें लिये बैठे थे
उनसे तन्हाइयों की सौगातें मिलेंगी बताया ना था

इतना  ही नही आता समझ
अगर  गया बदल तो क्यों
याद  आज वो गलियारे…..
आओ कुछ  निहारे अतीत के गर्त  में , 
शायद खो सकूँ गलियारों में…..

ख्याल.... प्रियंका श्री
तबाह कर चले है
वो जिंदगी अपनी,
किसी खुदगर्ज़ ,
इंसान के लिए।

तेरी निगाहें.... आशा सक्सेना
ऐसी आकर्षक निगाहें तेरी
यदि पड़ गईं किसी पर
देखते ही प्यार हो जाएगा
यदि भूल से भी वह इनसे
बच  कर निकल गया
दिन पूरा उसका खराब जायगा

उलूक टाईम्स.... डॉ. सुशील जी जोशी

अब देख कर
भी नीम की
हरियाली से
कढ़वाहट
आ रही है
कहे कोई
तो कोई
क्या कहे
और क्या करे
दें इज़ाज़त
दिग्विजय को
सादर










15 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभातम् आदरणीय सर।
    बहुत अच्छी रचनाएँ हैं सारी। भूमिका भी विचारणीय हैःः)
    एक बहुत सुंदर अंक की बढ़िया प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  2. वआआह.....
    सच में अच्छी प्रस्तुति
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. सस्नेहाशीष व असीम शुभकामनाओं के संग हार्दिक धन्यवाद/बधाई इस अति सुंदर संकलन के लिए

    जवाब देंहटाएं
  4. सुंदर गुल दस्तों से सजा संकलन आदरणीय,
    सभी रचनाऐं विशेषता समेट अप्रतिम सुंदर।
    सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत ही रोचक प्रस्तावना के साथ सुन्दर पुष्पगुच्छ सा संकलन । हार्दिक आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  6. सुप्रभात मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद |








    |

    जवाब देंहटाएं
  7. सुंंदर संकलन..
    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  8. अत्यंत सुन्दर प्रस्तुति👌
    मेरी रचना को स्थान देने के लिये हार्दिक धन्यवाद आपका

    जवाब देंहटाएं
  9. सुन्दर हलचल। आभार दिग्विजय जी 'उलूक' के आँखवाले अंधे को जगह देने के लिये।

    जवाब देंहटाएं
  10. आपके संकलन का एक खास अंदाज है जो हमे बहुत पसंद आता है। बहुत बधाई और आभार!!!

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  12. दिग्विजयजी हार्दिक आभार. प्रोत्साहन के लिए आप सभी को धन्यवाद.
    अलग अलग अंदाज़ और सब ख़ास. बधाई.

    जवाब देंहटाएं
  13. इस रचना पर श्री अनमोल माथुर ने एक कथा साझा की है "नमस्ते" पर, जो कविता के विचार क्रम को पूरा करती है.पढियेगा ज़रूर. ऐसा सौभाग्य कम ही मिलता है.

    जवाब देंहटाएं
  14. सुन्दर संकलन और गहरी भूमिका

    जवाब देंहटाएं
  15. बहुत सुंदर प्रस्तुति चयनित रचनाकारों को बधाई

    जवाब देंहटाएं

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