सादर अभिवादन
पूरे इतिहास में वर्ष के
हर दिन हर घण्टे में
कुछ न कुछ घटित होता है
और होते रहेगा...
पर गूगल जी महाराज के पास
आज का कोई रिकॉर्ड नहीं है...
यानि ..आज का दिन पाक साफ है
आज यदि आप कोई हंगामा करते हैं तो
आज का दिन आपके नाम में दर्ज हो जाएगा....
.....शुरु करते हैं हंगामा.....

सब हिसाब मांगते हैं।
और एक दिन ऐसा आता है,
जब जीवन हमसे हिसाब मांगता है ।
तुम्हें तो मैंने जीवन उपहार दिया था ।
तुमने उसे हिसाब-क़िताब कैसे समझ लिया ?
संसार ने तुम्हें बहुत कुछ दिया ।

पहाड़ों के ठाट भी बड़े निराले हैं
मरकत और सब्ज रंगों से सजे
अपनी ही धुन में मगन ।
कुदरत ने भी दोनों हाथों सेे
नेह की गागर इन पर
बड़े मन से छलकी है ।
आँखें जो खुली तो उन्हें अपने क़रीब पाया ना था
कभी थे रूह में शामिल आज उनका साया ना था
बेपनाह मोहब्बत की जिनसे उम्मीदें लिये बैठे थे
उनसे तन्हाइयों की सौगातें मिलेंगी बताया ना था

इतना ही नही आता समझ
अगर गया बदल तो क्यों
याद आज वो गलियारे…..
आओ कुछ निहारे अतीत के गर्त में ,
शायद खो सकूँ गलियारों में…..
ख्याल.... प्रियंका श्री
तबाह कर चले है
वो जिंदगी अपनी,
किसी खुदगर्ज़ ,
इंसान के लिए।
तेरी निगाहें.... आशा सक्सेना
ऐसी आकर्षक निगाहें तेरी
यदि पड़ गईं किसी पर
देखते ही प्यार हो जाएगा
यदि भूल से भी वह इनसे
बच कर निकल गया
दिन पूरा उसका खराब जायगा
उलूक टाईम्स.... डॉ. सुशील जी जोशी

अब देख कर
भी नीम की
हरियाली से
कढ़वाहट
आ रही है
कहे कोई
तो कोई
क्या कहे
और क्या करे
दें इज़ाज़त
दिग्विजय को
सादर
ख्याल.... प्रियंका श्री
तबाह कर चले है
वो जिंदगी अपनी,
किसी खुदगर्ज़ ,
इंसान के लिए।
तेरी निगाहें.... आशा सक्सेना
ऐसी आकर्षक निगाहें तेरी
यदि पड़ गईं किसी पर
देखते ही प्यार हो जाएगा
यदि भूल से भी वह इनसे
बच कर निकल गया
दिन पूरा उसका खराब जायगा
उलूक टाईम्स.... डॉ. सुशील जी जोशी

अब देख कर
भी नीम की
हरियाली से
कढ़वाहट
आ रही है
कहे कोई
तो कोई
क्या कहे
और क्या करे
दें इज़ाज़त
दिग्विजय को
सादर

