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गुरुवार, 28 जून 2018

1077....फिर खोजती हूँ - वो छोटा झरोखा...

सादर अभिवादन। 
बारिश की फुहारें आ गयीं 
देने तन-मन को सुकूं 
लुभाने लगी है अब  
कोयल की कुहू-कुहू। 

इस बीच विदेश से ख़बर आयी है कि आज भारत स्त्रियों के 
लिये दुनिया का सबसे असुरक्षित देश है। जो 2011 में चौथे 
स्थान पर था। अमेरिका जैसा विकसित देश भी आज इस सर्वे के 
अनुसार 193 देशों की सूची में  10 वें  स्थान पर है।  हालाँकि हमारी 
सरकार ने इस सर्वे को नकार दिया है लेकिन यह गहन चिंता का 
बिषय है कि स्त्रियों के प्रति भारतीय नागरिक इतने बदनाम 
क्यों हो रहे हैं विश्व स्तर पर.....
हम इस ख़बर से मुँह भी नहीं मोड़ सकते। इसके लिये केवल 
सरकार को जवाबदेह ठहराना अनुचित होगा।  क़ानूनों को 
ईमानदारी से लागू न किया जाना और समाज में जागरूकता का 
अभाव व संवेदनहीनता का बढ़ते जाना घोर चिंता का बिषय है। 
ऐसे समाचार हमारी सांस्कृतिक छवि तो धूमिल करते ही हैं 
साथ ही पर्यटन व आर्थिक पहलुओं को भी प्रभावित करते हैं।  

आइये अब आपको ले चलते हैं शब्द ,कल्पना और भाव से रची दुनिया में जहाँ व्यथित मन को सुकूं मिलता है और विमर्श को नये-नये आयाम -   





त्रसीत धरा बरसे कछु ऐेसे 
अमि कलश बिखरे  गागरिया 
हरख हरख मन भयो रे बावरों 
दौउ नयन खंजन दृग भरिया 
आज सखी .......🐝




मेरी फ़ोटो

‘आज़ादी पहुँच तो गयी, पर बुरी तरह लहूलुहान, ज़ख़्मी – जगह-जगह 
से जिस्म फट गया. कुछ अंग टूट गए. कुछ अटके रह गए. 
न इस तरफ़, न उस तरफ़ ---.’
गुलज़ार के इस उपन्यास की कहानी फिर एकदम से छलांग सी लगा 
लेती है और हम सालों की दहायियाँ एक साथ पार करने लगते हैं. कहानी बहुत तेज़ी से दौड़ने लगती है और भारत-पाकिस्तान की सरहदों को पार करते हुए वो इंग्लैंड के रिफ्यूजियों तक पहुँच जाती है. यहाँ कहानी में वो दम नहीं रह जाता जो इसके पहले दो भागों में था. 
लेकिन एक बार फिर गुलज़ार की कहानी हमारे दिल को तब फिर से छूने लगती है है जब वो इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुए सिक्खों के नृशंस हत्याकांड का दिल दहलाने वाला मंज़र पेश करते हैं.  



My photo

फिर खोजती हूँ -
वो छोटा झरोखा,
जिसमें से झाँके
अंबर का मुखड़ा,
सूरज की आँखें
बादल का चेहरा,
चंदा की साँसें
तारों की बातें,
हवा की हँसी !!!!



वो घर से बाहर क्या निकले
बाहर की दुनिया में खो गए
अपनी गृहस्थी बसा कर वो
मां-बाप की दुनिया भूल गए



My photo

मीठी वाणी से पता चला  वो इंसान कैसा है
तल्खियत से पता चला ज्ञान कितना है
स्पर्श से पता चला कि वो व्यक्ति कैसा है
वक्त ने बता दिया कि ये रिश्ता कैसा है




शाम को जब
दिन के तमाम
उलझनों से 
फारिग होकर
छत पर टहलने 
जाती हूँ तो ,
प्रकृति की छटा 
देखते ही बनती है 


अल्पाइन चाफ़ या पीले-चोंच वाली चाफ़, कौआ परिवार का  एक पक्षी है। इस पक्षी को, चमकदार काला पंख, एक पीली चोंच, लाल पैर और विशिष्ट आवाज़ के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है।


छपते -छपते
आओ भूत खोद कर लायें 

आओ 
‘उलूक’ 
संकल्प करें 
प्राणवान 
कुछ भी 
समझ 
में आये 
उसका श्राद्ध 
गया जाकर 
प्राण 
निकलवाने 
से पहले 
करवाने 
का आदेश 
करवायें 



अब  इस सप्ताह का विषय
हम-क़दम के पच्चीसवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........

आज के लिये बस इतना ही। 
मिलेंगे फिर अगले गुरूवार। 
कल की चर्चाकार हैं - आदरणीया श्वेता सिन्हा जी। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

13 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात भाई
    असुरक्षित तो वह पुरातन काल से है
    कामी-कपटी लोग तब भी थे
    और अब भी हैं...ये जरूर है कि
    अब कुछ ज़ियादा ही हैं
    अच्छी प्रस्तुति बनाई आज आपने..साधुवाद
    आभार
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. विचारणीय भुमिका के साथ अच्छी प्रस्तुति।
    सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  3. सुन्दर हलचल प्रस्तुति रवींद्र जी। आभार 'उलूक' की बड़बड़ को साझा करने के लिये।

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह!!रविन्द्र जी ,बहुत खूबसूरत प्रस्तुति ,एक विचारणीय भूमिका के साथ । सभी चयनित रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं ।

    जवाब देंहटाएं
  5. सुन्दर प्रस्तुति रवींद्र जी, आभार, इस चर्चा में सम्मलित सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  7. नमन रवींद्र जी सर्व प्रथम गौपेश जी का तीक्ष्ण और धारदार लेखन का अभिवादन ...संकलन अपनी हलचल बरकरार रखे है उसमें मेरे काव्य को स्थान दिया ...आभार 🙏

    जवाब देंहटाएं
  8. विचारणीय भूमिका के सुंदर लिंकों का चयन आज की प्रस्तुति को विशेष बना रही है।
    आभार।

    जवाब देंहटाएं
  9. पावस ऋतु आ ही गयी; स्वागत के साथ-साथ जरा सी सावधानी भी बरत लें तो यह खुशगवार मौसम और भी सुहावना हो जाएगा। आनंद लीजिए प्रकृति के इस अनमोल-नायाब-जीवनदायक उपहार का; और हो सके तो भरसक कोशिश और उपाय भी करें गगन से झरते इस अमृत को सहेजने का

    जवाब देंहटाएं
  10. सुंदर संकलन बेहतरीन रचनाएं

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत सुंदर संकलन
    उम्दा रचनाएँ

    जवाब देंहटाएं
  12. इस खूबसूरत प्रस्तुति में मेरी रचना को शामिल करने के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय रवींद्रजी। सादर।

    जवाब देंहटाएं

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